नई दिल्ली, 04 अगस्त (वेब वार्ता)। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) के विरोध में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। हालांकि आम आदमी पार्टी के मुख्यालय से कुछ दूरी पर ही पुलिस ने उन्हें और उनके साथ मौजूद नेताओं को रोक दिया। इसके बाद अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह सहित अन्य नेताओं ने सड़क पर धरना दिया तथा ऑनलाइन हस्ताक्षरों के माध्यम से तैयार किए गए ज्ञापन पुलिस अधिकारियों को सौंप दिए।
प्रदर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 पेट्रोल का मुद्दा देशभर के लोगों से जुड़ा हुआ है और इसके विरोध में नीट परीक्षा पत्र लीक प्रकरण से भी बड़ा जनआंदोलन खड़ा करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल एक राजनीतिक दल के आंदोलन से बात नहीं बनेगी, बल्कि पूरे देश को इस विषय पर अपनी आवाज उठानी होगी।
मार्च के दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनके साथ आए लोग शांतिपूर्ण ढंग से प्रधानमंत्री से मिलने और ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के हाथों में कोई हथियार या विस्फोटक नहीं था, बल्कि केवल याचिका थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत द्वारा इथेनॉल आयात किए जाने के पीछे अमेरिका का दबाव है। उनका कहना था कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर इथेनॉल का उत्पादन होता है और भारत में उसका उपयोग बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश के वाहन प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार इस विषय पर पुनर्विचार नहीं करती है तो देशभर में व्यापक जनसमर्थन के साथ आंदोलन किया जाएगा। उनके अनुसार जब बड़ी संख्या में नागरिक इस मुद्दे पर एकजुट होंगे, तब सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
पुलिस ने फिरोजशाह रोड पर मार्च को रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी कुछ समय तक वहीं धरने पर बैठे रहे। बाद में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अपना ज्ञापन पुलिस अधिकारियों को सौंपकर कार्यक्रम समाप्त किया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
उल्लेखनीय है कि ई-20 पेट्रोल को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बहस तेज हुई है। सरकार जहां इसे ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके वाहनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और नीति निर्माण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।




