बालाघाट, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाना क्षेत्र स्थित पिपरटोला गांव में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। खराब पानी की मोटर ठीक करने के लिए कुएं में उतरे एक व्यक्ति की जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी से तबीयत बिगड़ गई। उसे बचाने के लिए नीचे उतरा उसका मित्र भी गैस की चपेट में आ गया और दोनों की कुएं के भीतर ही मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, पिपरटोला निवासी महेश चौधरी (45) गुरुवार शाम लगभग साढ़े पांच बजे अपने मित्र युवराज बिसेन (55) के घर के पीछे बने करीब 50 फीट गहरे कुएं में खराब मोटर की मरम्मत के लिए उतरे थे। कुछ ही देर बाद कुएं के भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण वह बेहोश होकर गिर पड़े।
जब काफी देर तक महेश चौधरी बाहर नहीं आए तो ऊपर मौजूद युवराज बिसेन बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन्हें बचाने के लिए कुएं में उतर गए। हालांकि नीचे पहुंचते ही वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलने पर किरनापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कुएं में जहरीली गैस होने की आशंका के कारण तत्काल बचाव अभियान शुरू नहीं किया जा सका। इसके बाद राज्य आपदा आपात प्रतिक्रिया बल की टीम को बुलाया गया।
रात में शुरू हुए बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा उपकरणों से लैस राज्य आपदा आपात प्रतिक्रिया बल के जवानों ने करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद दोनों शवों को सुरक्षित बाहर निकाला। रस्सियों, ऑक्सीजन सिलेंडर और विशेष सुरक्षा उपकरणों की सहायता से रात लगभग 10 बजे के बाद यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पूरे अभियान के दौरान गांव के बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर मौजूद रहे।
किरनापुर थाना प्रभारी राजकुमार चौधरी ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण कुएं के भीतर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी माना जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
इस बचाव अभियान में पुलिस, होमगार्ड और राज्य आपदा आपात प्रतिक्रिया बल के जवानों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुएं, सेप्टिक टैंक और अन्य बंद स्थानों में बिना गैस परीक्षण तथा सुरक्षा उपकरणों के प्रवेश करना अत्यंत जोखिमपूर्ण होता है। ऐसे स्थानों में उतरने से पहले पर्याप्त वायु संचार सुनिश्चित करना, गैस की जांच करना और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना आवश्यक है, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।




