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जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की मजबूत मौजूदगी, एवियन पहुंचे नरेन्द्र मोदी; वैश्विक मुद्दों पर रखेंगे देश का पक्ष

नई दिल्ली, 16 जून (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंच गए हैं। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत एक भागीदार देश के रूप में हिस्सा ले रहा है। सम्मेलन के दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने सामाजिक माध्यम पर अपने आगमन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ विचार-विमर्श और समकालीन वैश्विक विषयों पर संवाद को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने दोहराया कि भारत टिकाऊ विकास और समृद्ध भविष्य के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

स्विट्जरलैंड से फ्रांस तक कूटनीतिक सक्रियता

फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्लोवाकिया से जिनेवा होते हुए रवाना हुए थे। जिनेवा में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी सहयोग को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय ने भी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

विश्व नेताओं के साथ अहम बैठकें

तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची सहित कई प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में यह मंच वैश्विक नीति निर्धारण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सम्मेलन के दौरान कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन वार्ताओं में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी प्रमुख एजेंडा रहेंगे।

कनाडा के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को आगे बढ़ाने तथा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा होगी। वहीं, ब्रिटेन के साथ हालिया व्यापार समझौते के क्रियान्वयन और ‘रोडमैप 2030’ के तहत सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। संयुक्त अरब अमीरात के साथ व्यापार, निवेश और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी बातचीत होने की संभावना है।

ट्रंप-मोदी मुलाकात पर टिकी निगाहें

जी-7 सम्मेलन के दौरान सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर है। पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां, अमेरिका-ईरान समझौता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दे दोनों नेताओं के बीच चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

अमेरिका-ईरान समझौते पर ट्रंप का दावा

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है और उसके सफल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अब अगले चरण में प्रवेश करेगी। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा

जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी को वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती स्वीकार्यता और प्रभाव का संकेत माना जा रहा है। भले ही भारत जी-7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन प्रमुख भागीदार देश के रूप में उसकी उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, ऊर्जा सहयोग और सामूहिक विकास की दिशा में भारत की सक्रिय भागीदारी का भी प्रतीक है।

जी-7 सम्मेलन में भारत की मौजूदगी एक बार फिर यह संदेश दे रही है कि विश्व व्यवस्था के बदलते परिदृश्य में भारत न केवल एक महत्वपूर्ण साझेदार है, बल्कि वैश्विक समाधान का सक्रिय सहभागी भी बनकर उभर रहा है।

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