कुशीनगर, 12 जून (ममता तिवारी)। उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की लंबे समय से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं, इसलिए उनके कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और पेशेवर सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सरकार की प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए। भानु प्रताप तिवारी ने कहा कि कुशीनगर मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति की ओर से कई बार ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का प्रस्ताव प्रदेश में अब तक लंबित है।
उन्होंने मांग की कि प्रदेश सरकार सभी सरकारी एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मान्यता प्राप्त पत्रकारों और उनके आश्रितों के लिए कैशलेस उपचार की व्यवस्था लागू करे, ताकि आपात परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि देश के कई राज्यों में 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पत्रकारों को 15,000 से 20,000 रुपये तक मासिक पेंशन प्रदान की जा रही है, जबकि प्रदेश के वरिष्ठ मान्यता प्राप्त पत्रकार आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से वरिष्ठ मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए 20,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन योजना शुरू करने का आग्रह किया है। तिवारी ने प्रदेश मान्यता समिति के गठन में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से समिति का गठन नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पत्रकारों के मान्यता संबंधी आवेदन लंबित पड़े हैं, जिससे उन्हें अपने पेशेवर दायित्वों के निर्वहन में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से समिति का तत्काल गठन कर लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा, “पत्रकार लोकतंत्र की मजबूती और जनहित की आवाज़ को समाज तथा सरकार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और मान्यता से जुड़े मुद्दों का समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए। हमें विश्वास है कि प्रदेश सरकार पत्रकार हितों को ध्यान में रखते हुए इन लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर उन्हें अमल में लाएगी।




