नई दिल्ली, 06 जून (वेब वार्ता)। कमर्शियल रसोई गैस और संपीड़ित प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की दरों को लेकर आम लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये मार्च से पुराने स्तर पर ही बनी हुई हैं।
एक जून को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर संशोधन किया गया। राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जबकि कोलकाता में यह बढ़ोतरी 53.50 रुपये रही। वहीं दिल्ली में पांच किलोग्राम वाले मुक्त व्यापार श्रेणी के गैस सिलेंडर की कीमत 11 रुपये बढ़कर 821.50 रुपये हो गई है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले गैस सिलेंडर की कीमत मार्च की शुरुआत से 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। मार्च में इसकी कीमत में 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। इसके बाद से घरेलू गैस दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन की उपलब्धता, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी तथा तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण कीमतों में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सरकार का कहना है कि घरेलू आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और ईंधन भंडार को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से कीमतों में वृद्धि का उद्देश्य तेल कंपनियों पर पड़ रहे मार्जिन के दबाव को कम करना है, ताकि उपभोक्ताओं को एकमुश्त महंगाई का बड़ा झटका न लगे। इसके बावजूद बढ़ती कीमतों का असर महंगाई पर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
प्रमुख शहरों में गैस सिलेंडर की कीमतें
| शहर | घरेलू सिलेंडर | कमर्शियल सिलेंडर |
|---|---|---|
| दिल्ली | 913 रुपये | 3071.50 रुपये |
| मुंबई | 912.50 रुपये | 3024 रुपये |
| कोलकाता | 939 रुपये | 3202.50 रुपये |
| चेन्नई | 928.50 रुपये | 3237 रुपये |
| पटना | 1002.50 रुपये | 3347 रुपये |
| जयपुर | 916.50 रुपये | 3099 रुपये |
सप्लाई लागत में भी आया उछाल
हाल के महीनों में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह लागत बढ़कर लगभग 1200 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई है, जबकि उपभोक्ताओं को यही सिलेंडर 913 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
आपूर्ति लागत में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह प्रोपेन के लिए सऊदी अनुबंध मूल्य में आई तेज वृद्धि को माना जा रहा है। भारत अपनी रसोई गैस की आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है और इसके लिए सऊदी अरामको का अनुबंध मूल्य वैश्विक मानक के रूप में देखा जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति प्रभावित होने के बाद अप्रैल में अनुबंध मूल्य में लगभग 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। सरकारी सूत्रों का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में घरेलू रसोई गैस की दरें क्षेत्र के कई पड़ोसी देशों की तुलना में अब भी अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं। सब्सिडी वाले और बिना सब्सिडी वाले दोनों प्रकार के घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतें अन्य देशों की तुलना में कम बताई जा रही हैं, हालांकि विभिन्न देशों में सिलेंडरों के आकार में अंतर मौजूद है।




