भोपाल, 04 जून (अकबर खान)। भोपाल स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वाग्देवी के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करना चाहती है तो नया विश्वविद्यालय बनाए, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से चल रहे संस्थान का नाम नहीं बदले।
आरिफ मसूद ने कहा कि यह निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सरकार नाम परिवर्तन जैसे विषयों को आगे बढ़ा रही है।
“नया विश्वविद्यालय बना लें, नाम न बदलें”
कांग्रेस विधायक ने कहा कि वाग्देवी के नाम पर नया विश्वविद्यालय स्थापित करने में किसी को आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले भी नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं और उनका स्वागत किया गया है।
उन्होंने कहा कि करीब 38 वर्षों से एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम से चल रहे विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार मौलाना बरकतुल्लाह केवल भोपाल के निवासी नहीं थे, बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे।
राज्यपाल से मिलने की तैयारी
आरिफ मसूद ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर राज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होने के नाते राज्यपाल की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी अपील करते हुए कहा कि यदि सरकार सिद्धांतों और ऐतिहासिक विरासत के सम्मान की बात करती है तो उसे मौलाना बरकतुल्लाह के नाम को बनाए रखना चाहिए।
उच्च शिक्षा मंत्री के बयान पर भी प्रतिक्रिया
विधायक ने उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा प्रस्ताव का अध्ययन करने और मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्यपरिषद की ओर से मौलाना बरकतुल्लाह के संबंध में की गई टिप्पणियां उचित हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद का दायित्व शिक्षा और संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ाना है, न कि विवादों को जन्म देना।
मौलाना बरकतुल्लाह के योगदान का किया उल्लेख
आरिफ मसूद ने कहा कि मौलाना बरकतुल्लाह उन प्रमुख क्रांतिकारियों में थे जिन्होंने विदेशों में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि वह भारत की निर्वासित अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री भी रहे थे और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान ऐतिहासिक महत्व रखता है।
विधायक ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को समझे बिना ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे महान क्रांतिकारियों की विरासत प्रभावित हो सकती है।
सरकार ने कहा, सभी पहलुओं पर होगा विचार
वहीं राज्य सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग और राज्य सरकार प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेंगे।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने हाल ही में संस्थान का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने का प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव को आगे की मंजूरी के लिए राज्यपाल और राज्य सरकार के पास भेजा गया है। अंतिम निर्णय विधायी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर अब यह मुद्दा शिक्षा से आगे बढ़कर राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




