भोपाल, 04 जून (वेब वार्ता)। भोपाल स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने संस्थान का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह प्रस्ताव आगे की स्वीकृति के लिए उच्च शिक्षा विभाग, राज्य सरकार और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं के लिए भेजा जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार नाम परिवर्तन का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को नई पहचान देना है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एस. बी. सिंह ने बताया कि प्रस्ताव में परमार वंश के महान शासक राजा भोज के साहित्य, शिक्षा, विज्ञान और स्थापत्य कला में योगदान को प्रमुख आधार बनाया गया है।
राजा भोज की विरासत को आधार बनाने का तर्क
प्रस्ताव में कहा गया है कि राजा भोज का नाम भोपाल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। भोजताल, भोजपुर मंदिर और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराएं उनकी विरासत की प्रतीक मानी जाती हैं। प्रस्ताव के अनुसार राजा भोज ने अनेक ग्रंथों की रचना की और उनके शासनकाल में धार शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख केंद्र बना। प्रस्ताव में ‘वाग्देवी’ नाम को ज्ञान और वाणी की देवी से जोड़ते हुए भोजशाला की ऐतिहासिक परंपरा का भी उल्लेख किया गया है।
कार्यकारी परिषद में विरोध की आवाज भी उठी
सूत्रों के अनुसार कार्यकारी परिषद की सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी नेता मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली की स्मृति में रखा गया है, इसलिए इसे बदलना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना है तो उसके लिए अलग विश्वविद्यालय बनाया जा सकता है।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को नाम बदलने के बजाय शैक्षणिक और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पाठ्यक्रमों में शैक्षणिक सत्र प्रभावित हैं और संस्थान को बुनियादी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने की दिशा में उठाया गया कदम है।
कौन थे मौलाना बरकतुल्लाह?
मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 7 जुलाई 1854 को भोपाल में हुआ था। वे गदर आंदोलन से जुड़े रहे और ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे। इतिहासकारों के अनुसार वह अफगानिस्तान में स्थापित भारत की पहली निर्वासित अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री भी रहे थे। अरबी, फारसी, अंग्रेजी और जापानी भाषाओं के ज्ञाता बरकतुल्लाह ने कई देशों में शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी योगदान दिया।
अब आगे क्या होगा?
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार समर बहादुर सिंह के अनुसार कार्यकारी परिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे औपचारिक मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। चूंकि किसी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन आवश्यक होता है, इसलिए प्रस्ताव को विधानसभा से पारित कराना होगा। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति और राजपत्र अधिसूचना जारी होने के पश्चात ही नया नाम आधिकारिक रूप से लागू हो सकेगा।
विश्वविद्यालय का व्यापक शैक्षणिक दायरा
वर्ष 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित इस विश्वविद्यालय का नाम वर्ष 1988 में मौलाना बरकतुल्लाह के सम्मान में बदला गया था। लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में फैला यह विश्वविद्यालय भोपाल, सीहोर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल और राजगढ़ सहित कई जिलों को शैक्षणिक सेवाएं प्रदान करता है। विश्वविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, शिक्षा, अभियांत्रिकी, प्रबंधन और अन्य विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। इसी के साथ विश्वविद्यालय ने पारंपरिक भाषाओं और संस्कृति से जुड़े विभागों के पुनर्गठन के प्रस्तावों पर भी विचार शुरू किया है। नाम परिवर्तन के इस प्रस्ताव ने मध्य प्रदेश में इतिहास, संस्कृति, शिक्षा और विरासत को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जो आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।




