मुंबई, 03 जून (वेब वार्ता)। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक मंगलवार से शुरू हो गई। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के दबाव के बीच आयोजित इस बैठक पर वित्तीय बाजारों, उद्योग जगत और आम उपभोक्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं। समिति के निर्णयों की घोषणा शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार केंद्रीय बैंक प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा। ऐसे में गृह ऋण, वाहन ऋण और अन्य खुदरा ऋणों की मासिक किस्तों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। आरबीआई फिलहाल महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। यदि तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका सीधा असर परिवहन लागत और आवश्यक वस्तुओं के दामों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक किसी भी नीतिगत निर्णय को लेकर सतर्कता बरत रहा है।
मानसून की स्थिति भी आरबीआई के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की आशंका बढ़ जाएगी। ऐसे हालात में खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है।
देश की आर्थिक वृद्धि को लेकर विभिन्न एजेंसियों ने सकारात्मक अनुमान व्यक्त किए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में वृद्धि दर छह प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित किए बिना ब्याज दरों में कटौती की दिशा में कदम उठाना आरबीआई के लिए आसान नहीं होगा।
वित्तीय क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि ब्याज दरों में कमी का चक्र शुरू होने में अभी समय लग सकता है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष की अंतिम तिमाही से पहले दरों में कटौती की संभावना सीमित दिखाई दे रही है। ऐसे में ऋण लेने वाले उपभोक्ताओं और निवेशकों को फिलहाल यथास्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।
मौद्रिक नीति समिति की इस बैठक से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि आने वाले महीनों में महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक किस प्रकार की रणनीति अपनाने जा रहा है।




