देहरादून, 02 जून (वेब वार्ता)। बहुचर्चित एलयूसीसी घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एजेंसी ने मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को मुंबई से हिरासत में लिया गया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
सीबीआई के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान पंकज जैन उर्फ पंकज चौधरी और किशन जैन के रूप में हुई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों व्यक्ति मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी की धनराशि को विभिन्न संपत्तियों की खरीद में निवेश करने में भूमिका निभा रहे थे।
अब तक पांच गिरफ्तारियां
सीबीआई इससे पहले तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार लोगों में मुख्य आरोपी का एक करीबी रिश्तेदार भी शामिल बताया जा रहा है। वहीं मामले का मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल अभी भी एजेंसियों की पहुंच से बाहर है और उसके विदेश में होने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसी लगातार आर्थिक लेनदेन, निवेश और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है ताकि घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सके।
करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
जांच के दौरान सामने आया है कि यह मामला सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और निवेशकों से धोखाधड़ी से जुड़ा है। सीबीआई के अनुसार अब तक बड़ी मात्रा में धनराशि निवेशकों को वापस किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि धनराशि का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और किन व्यक्तियों या संस्थाओं को इसका लाभ पहुंचा।
प्रदेशभर में फैला था नेटवर्क
जांच के अनुसार लोनी अर्बन मल्टी क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी नामक संस्था ने उत्तराखंड सहित कई राज्यों में निवेश के नाम पर लोगों से धन एकत्र किया था। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षक योजनाओं का लालच देकर निवेश कराया गया और बाद में उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया था कि प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या निम्न आय वर्ग से जुड़े परिवारों, महिलाओं और छोटे निवेशकों की थी। संस्था की गतिविधियां उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों तक फैली हुई थीं।
उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई सीबीआई जांच
मामले में विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों और बढ़ती शिकायतों के बाद जांच की मांग तेज हुई थी। इसके बाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी।
सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एजेंसी ने व्यापक स्तर पर जांच शुरू की और अब लगातार कार्रवाई करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी कर रही है।
सीबीआई का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।




