मुंबई, 27 मई (वेब वार्ता)। बॉलीवुड अभिनेता जायेद खान ने अपने फिल्मी करियर को लेकर खुलकर बात करते हुए स्वीकार किया है कि शुरुआती सफलता के बाद लिए गए कुछ फैसलों ने उनके करियर को प्रभावित किया। वर्ष 2004 में फिल्म ‘मैं हूं ना’ से मिली लोकप्रियता के बावजूद वे लंबे समय तक खुद को उद्योग में स्थापित नहीं कर सके और धीरे-धीरे बड़े पर्दे से दूर होते चले गए।
फराह खान निर्देशित ‘मैं हूं ना’ में शाहरुख खान के साथ निभाए गए ‘लकी’ के किरदार ने जायेद खान को रातों-रात युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया था। उनके स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस को खूब पसंद किया गया और उस समय उन्हें बॉलीवुड का अगला बड़ा सितारा माना जाने लगा था। हालांकि शुरुआती सफलता का यह दौर लंबे समय तक कायम नहीं रह सका।
एक हालिया साक्षात्कार में जायेद खान ने स्वीकार किया कि ‘मैं हूं ना’ की सफलता के बाद वे कुछ हद तक लापरवाह हो गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें अपनी समझ और फैसलों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा था और यही आत्मविश्वास बाद में घमंड में बदल गया। अभिनेता ने माना कि उन्होंने करियर के उस दौर में कई ऐसी गलतियां कीं, जिन्हें टाला जा सकता था।
जायेद खान के अनुसार उद्योग के कई जानकारों ने उन्हें एकल नायक वाली फिल्मों पर ध्यान देने की सलाह दी थी, ताकि वे अपनी अलग पहचान और मजबूत छवि बना सकें। लेकिन उस समय उनका झुकाव बड़े बजट और बहु-कलाकार फिल्मों की ओर अधिक था। उनका मानना है कि अभिनेता के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि वह अकेले भी फिल्म को सफल बना सकता है, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।
उन्होंने कहा कि बहु-कलाकार फिल्मों की ओर जल्दी बढ़ना उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ। जायेद के मुताबिक उन्हें पहले अपना अलग ‘ब्रांड’ बनाना चाहिए था और उसके बाद बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना चाहिए था। उन्होंने माना कि ‘ब्लू’ जैसी बड़ी फिल्म को उस समय मना करना आसान नहीं था, लेकिन कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स ने उम्मीद के विपरीत उनके करियर को नुकसान पहुंचाया।
अभिनेता ने यह भी खुलासा किया कि फिल्मों के चयन को लेकर उनके और उनके पिता, अभिनेता-निर्माता संजय खान के बीच अक्सर मतभेद होते थे। जायेद ने कहा कि उनके पिता कई फैसलों को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन उस समय युवा होने के कारण उन्हें लगता था कि वे सब कुछ बेहतर समझते हैं। अब पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें महसूस होता है कि कई मामलों में पिता की सलाह सही थी।
जायेद खान ने कहा कि करियर में मुश्किल दौर आने का अर्थ यह नहीं होता कि कोई भी काम स्वीकार कर लिया जाए। इसी सोच के कारण उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्मी दुनिया और चकाचौंध से दूरी बनाने का फैसला किया। वे ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे, जो उन्हें भीतर से सही नहीं लगते थे।
जायेद खान आखिरी बार वर्ष 2015 में फिल्म ‘शराफत गई तेल लेने’ में नजर आए थे। उन्होंने छोटे पर्दे पर भी काम किया, लेकिन लंबे समय से अभिनय से दूरी बनाए हुए हैं। उनके प्रशंसक आज भी ‘मैं हूं ना’ के ‘लकी’ वाले अंदाज को याद करते हैं और उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं।




