नई दिल्ली, 27 मई (वेब वार्ता)। आयकर रिटर्न दाखिल करना अब केवल वार्षिक औपचारिकता नहीं रह गया है। बदलते नियमों और डिजिटल प्रक्रियाओं के बीच करदाताओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है कि उनकी पहचान और बैंकिंग संबंधी सभी जानकारियां सही और अद्यतन हों। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी सी लापरवाही भी रिफंड में देरी या प्रक्रिया में अड़चन का कारण बन सकती है।
आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात पैन और आधार कार्ड का आपस में लिंक होना है। यदि दोनों दस्तावेज जुड़े नहीं हैं, तो रिटर्न दाखिल करने और कर संबंधी कई सेवाओं में परेशानी आ सकती है। इसलिए करदाताओं को पहले ही यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका पैन-आधार विवरण सही स्थिति में है।
रिफंड पाने के इच्छुक करदाताओं के लिए बैंक खातों का सत्यापन भी अनिवार्य माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार रिटर्न की प्रक्रिया पूरी करने और रिफंड प्राप्त करने के लिए मोबाइल ओटीपी, नेट बैंकिंग अथवा डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जैसे प्रमाणीकरण माध्यमों तक पहुंच होना आवश्यक है। बैंक खाते की जानकारी में त्रुटि होने पर रिफंड अटक सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों और कर विवरणों की सावधानी से समीक्षा कर लेनी चाहिए। इसमें फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण, करदाता सूचना सारांश और फॉर्म 26एएस विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन दस्तावेजों में दर्ज आय, कर कटौती और अन्य वित्तीय जानकारियों का मिलान करना आवश्यक होता है।
आयकर नियमों के तहत कई प्रकार की छूट और कटौतियों का लाभ भी उपलब्ध है। मकान किराया, अवकाश यात्रा भत्ता, धारा 80सी के अंतर्गत निवेश, धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा तथा गृह ऋण के ब्याज पर मिलने वाली कर छूट को सही ढंग से शामिल करने से कर दायित्व कम किया जा सकता है।
आय के स्वरूप के अनुसार दस्तावेज तैयार रखना भी जरूरी है। वेतनभोगी करदाताओं को वेतन पर्ची, फॉर्म 16 और किराया रसीदें सुरक्षित रखनी चाहिए, जबकि पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों को पेंशन संबंधी पूरा विवरण तैयार रखना चाहिए। इससे रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान और त्रुटिरहित रहती है।
विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खातों से जुड़े मामलों में विशेष सतर्कता की आवश्यकता होती है। नियमों के अनुसार यदि किसी भारतीय निवासी के पास विदेश में बैंक खाता, विदेशी शेयर या अन्य संपत्ति है, तो उसका विवरण आयकर रिटर्न में देना अनिवार्य है, भले ही उससे कोई आय या लाभ प्राप्त न हुआ हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी संपत्तियों या खातों की जानकारी छिपाने पर भारी जुर्माना लग सकता है और कर अधिकारियों की जांच का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सही जानकारी देना कानूनी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
आयकर विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम समय की जल्दबाजी से बचते हुए करदाता पहले से दस्तावेजों की तैयारी पूरी कर लें और सभी जानकारियों का मिलान करने के बाद ही रिटर्न दाखिल करें, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी या रिफंड में देरी का सामना न करना पड़े।




