रायपुर, 21 मई (वेब वार्ता)। छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर डाले जा रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर सख्त कदम उठाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में निगरानी और जांच समितियों के गठन के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय फीस वृद्धि, किताबों और गणवेश की अनियमित बिक्री से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया है।
स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर से जारी निर्देश में कहा गया है कि कई अशासकीय विद्यालय अभिभावकों को एक निर्धारित दुकान या फर्म से ही किताबें, गणवेश और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे पालकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है और उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने जिला और विकासखंड स्तर पर अलग-अलग समितियों का गठन किया है। जिला स्तरीय समिति में कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और वस्तु एवं सेवा कर विभाग के सहायक आयुक्त को शामिल किया गया है। वहीं विकासखंड स्तर पर उपखंड अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और वस्तु एवं सेवा कर निरीक्षक जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने से संबंधित शिकायतों पर स्वतः संज्ञान लिया जाएगा। ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम-2020 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के अनुसार गठित समितियां शिकायतों की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करेंगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस फैसले को अभिभावकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से निजी स्कूलों में मनमानी फीस और तय दुकानों से सामग्री खरीदने के दबाव को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। अब निगरानी तंत्र सक्रिय होने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।




