कोटा/नई दिल्ली, 13 मई (वेब वार्ता)। नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। राजस्थान के कोटा सहित कई शहरों के विद्यार्थियों ने पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए मेडिकल प्रवेश परीक्षा को संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तर्ज पर ऑनलाइन कराने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और परिवार की उम्मीदों से जुड़ी इस परीक्षा में बार-बार हो रही गड़बड़ियों से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रश्नपत्र लीक होना पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जाए तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की घोषणा से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ गया है।
कोटा में रहकर तैयारी कर रहे छात्र तन्मय गुर्जर ने बताया कि उनका परीक्षा परिणाम अच्छा रहने की उम्मीद थी, लेकिन अब दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की बड़ी कमी है और इसमें सुधार होना चाहिए। उनका कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली लागू करने से पारदर्शिता बढ़ सकती है।
छात्र सुमित ने कहा कि बार-बार परीक्षा लीक होने की घटनाएं छात्रों का भरोसा तोड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी महीनों तक कठिन मेहनत करते हैं और परीक्षा के बाद राहत महसूस करते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उन्हें फिर से उसी दबाव और तैयारी के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
छात्र लखन ने कहा कि परिवार बड़ी मुश्किलों से बच्चों को कोचिंग के लिए बाहर भेजते हैं। कई परिवार आर्थिक परेशानियों के बीच पढ़ाई का खर्च उठाते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनती छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद प्रश्नपत्र लीक होना गंभीर लापरवाही है, जिसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और सरकार दोनों की बनती है।
विद्यार्थी हिमांशु ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से छात्रों का मनोबल कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई परिवार दोबारा तैयारी और कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते। ऐसे मामलों से छात्रों में असमंजस और मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
छात्रा फेबा ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों ने पूरे वर्ष कठिन परिश्रम के साथ परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन पेपर लीक की घटनाओं ने उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि यदि दोबारा परीक्षा में प्रश्नपत्र अधिक कठिन या लंबा आता है तो कटऑफ में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की जिम्मेदारी है और इस दिशा में सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।




