नैनीताल, 09 मई (वेब वार्ता)। खुर्पाताल क्षेत्र में नियमों का पालन किए बिना संचालित किए जा रहे दो रिसॉर्ट्स के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पक्षकारों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन जून की तिथि तय की है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई।
हरिद्वार निवासी ललित मिगलानी द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि उत्तराखंड पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की जांच में मैसर्स हॉलिडे होम और मैसर्स डायनेस्टी रिसॉर्ट नियमों का पालन नहीं करते पाए गए थे। इसके बाद मैसर्स डायनेस्टी रिसॉर्ट के खिलाफ 20 अप्रैल 2026 को बंद करने का आदेश जारी किया गया था।
याचिका में आरोप लगाया गया कि बंद करने के आदेश के बावजूद रिसॉर्ट का संचालन जारी है। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि 48 घंटे के भीतर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित होटल तब तक बंद रहे, जब तक सभी वैधानिक नियमों का पालन नहीं हो जाता।
हाईकोर्ट ने मामले में नए जोड़े गए प्रतिवादियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही अदालत ने नैनीताल के जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी को भी पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी है।
अदालत ने निर्देश दिए कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि जलग्रहण क्षेत्र से हटाए गए अस्थायी स्टॉल दोबारा उस क्षेत्र पर कब्जा न करें। इस संबंध में संबंधित एसडीएम को अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि संबंधित क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण न हो सके। अदालत ने साफ कहा कि पर्यावरणीय नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




