मिडिल ईस्ट तनाव से भारत में एलपीजी संकट गहराया, आयात में भारी गिरावट

नई दिल्ली, 08 मई (वेब वार्ता)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की सप्लाई गंभीर संकट का सामना कर रही है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के चलते इस सप्लाई श्रृंखला पर बड़ा असर पड़ा है।

जानकारी के अनुसार फरवरी 2026 तक भारत हर महीने करीब 20 लाख टन एलपीजी आयात कर रहा था, लेकिन मार्च में यह घटकर लगभग 11 लाख टन रह गया। अप्रैल में स्थिति और खराब हो गई तथा आयात केवल 9.5 लाख टन तक सिमट गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी अनिश्चितता और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण आने वाले महीनों में भी सप्लाई सामान्य होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में शामिल माना जाता है। आमतौर पर दुनिया भर में निर्यात होने वाले पेट्रोलियम और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के चलते जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है।

युद्ध शुरू होने से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 130 से 140 जहाज गुजरते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। इसका सीधा असर भारत समेत उन देशों पर पड़ा है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। हालांकि कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है, लेकिन सबसे अधिक असर एलपीजी पर देखने को मिला है।

कमोडिटी बाजार विश्लेषण कंपनी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक भारत का औसत एलपीजी आयात लगभग 20 लाख टन प्रतिमाह था। मार्च में यह घटकर 11 लाख टन और अप्रैल में 9.5 लाख टन तक पहुंच गया। इससे देश में गैस आपूर्ति का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्थिति को देखते हुए भारत को औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति सीमित करनी पड़ी है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा सके। देश में 33 करोड़ से अधिक परिवार खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। सरकार और तेल कंपनियों ने मांग नियंत्रित करने के लिए घरेलू गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के बीच न्यूनतम समय अंतराल भी बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई तो भारत को आने वाले समय में और बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

कितना घटा इम्पोर्ट?

महीनाLPG का आयात (लाख टन में)खपत में गिरावटवजह
फरवरी 202620.00% सामान्यजंग से पहले की स्थिति
मार्च 202611.013% की गिरावटहोर्मुज की नाकेबंदी से इम्पोर्ट रह गया आधा
अप्रैल 20260.9516.2% की गिरावटइम्पोर्ट अब तक के सबसे निचले स्त पर पहुंचा

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