कानपुर, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बावजूद शहर में पुलिस का रुतबा लगातार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। बीते 15 दिनों में पुलिस पर सात बार जानलेवा हमले हुए हैं, जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन हमलों के पीछे कोई संगठित अपराधी गिरोह नहीं, बल्कि आम नागरिक ही शामिल रहे हैं।
स्थिति यह है कि कहीं पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ी गई, तो कहीं उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। कई मामलों में पथराव कर पुलिस बूथ तक क्षतिग्रस्त कर दिए गए। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि कानून का भय कम होता जा रहा है और खाकी खुद को बचाने में लगी हुई दिख रही है।
हाल के मामलों में 23 अप्रैल को कैंट क्षेत्र के नए गंगापुल पर इनोवा सवार ने ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर रमेश कुमार सरोज को कुचलने का प्रयास किया। 21 अप्रैल को घंटाघर चौराहे पर चालान किए जाने से नाराज टेंपो चालक और उसके साथियों ने पुलिस बूथ पर पथराव कर शीशे तोड़ दिए।
20 अप्रैल को बिठूर के टिकरा गांव में चेकिंग के दौरान बोलेरो सवार पूर्व प्रधान प्रदीप सिंह ने दरोगा को कुचलने की कोशिश की और एक कारोबारी फूल सिंह को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। 19 अप्रैल को हर्ष नगर में डायल सेवा में तैनात कांस्टेबल धीरेंद्र कुमार पर हमला कर उनका सिर फोड़ दिया गया और वर्दी फाड़ दी गई।
इसी दिन गुमटी क्षेत्र में ट्रैफिक सिपाही राकेश मिश्रा को सड़क पर वाहन खड़ा करने से मना करने पर पीटा गया और धमकियां दी गईं। 11 अप्रैल को नरवल के ग्राम पाली में पुलिसकर्मियों को दौड़ाकर पीटा गया और चौकी में आग लगाने की धमकी दी गई।
लगातार बढ़ती इन घटनाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने सभी मामलों में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की है, लेकिन बार-बार हो रहे हमले यह संकेत दे रहे हैं कि जमीनी स्तर पर कानून का असर कमजोर पड़ रहा है।



