नई दिल्ली, 24 अप्रैल (वेब वार्ता)। केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग को लागू करने के फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। सरकार के इस कदम से असंतुष्ट विभिन्न यूनियनों ने आयोग के समक्ष अपना नया मांग पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें न्यूनतम मूल वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की मांग की गई है।
दरअसल, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया के तहत सरकार ने कर्मचारियों और संगठनों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसी क्रम में Bharatiya Pratiraksha Mazdoor Sangh ने अपना विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। संगठन ने मौजूदा वेतन संरचना में व्यापक बदलाव की आवश्यकता जताते हुए न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 72 हजार रुपये प्रति माह करने की मांग रखी है।
संगठन का तर्क है कि वर्तमान में लागू सातवें वेतन आयोग के तहत निर्धारित 18 हजार रुपये का न्यूनतम वेतन बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के अनुरूप नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इसमें संशोधन जरूरी है, ताकि उन्हें बेहतर जीवन स्तर मिल सके।
इसके अलावा यूनियन ने फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 4.0 करने की मांग की है। फिटमेंट फैक्टर ही यह निर्धारित करता है कि वेतन में कुल कितना इजाफा होगा। यदि इसे 4.0 किया जाता है, तो कर्मचारियों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
यूनियन ने महंगाई भत्ते को भी तर्कसंगत तरीके से निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि बढ़ती महंगाई का प्रभाव कर्मचारियों की आय पर न पड़े। उनका कहना है कि वेतन संरचना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो सरकारी कर्मचारियों के वेतन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।





