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भीषण गर्मी का प्रकोप: तपते शहर, बदलती दिनचर्या और राहत की तलाश में आमजन

-कांतिलाल मांडोत- Kantilal Mandot

उत्तर भारत से लेकर पश्चिम और मध्य भारत तक इन दिनों गर्मी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है, हवा में तपिश घुली हुई है और दोपहर का समय तो जैसे आग उगलता प्रतीत होता है। हालात ऐसे हैं कि लोग जरूरी कामों के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। जो निकल भी रहे हैं, वे छाता, गमछा या कपड़े से खुद को ढककर ही बाहर कदम रख रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग इस भीषण गर्मी की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं।

लखनऊ में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार यह सामान्य से कई डिग्री अधिक है, जिससे गर्मी की तीव्रता और भी अधिक महसूस हो रही है। स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है ताकि बच्चों को दोपहर की तेज धूप से बचाया जा सके। अब स्कूल सुबह जल्दी शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक बंद हो जा रहे हैं। इसके बावजूद जब बच्चे स्कूल से घर लौटते हैं, तब तक सूरज अपनी पूरी तपिश के साथ मौजूद रहता है और उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बच्चे थकान, पसीना और चक्कर जैसी समस्याओं से जूझते दिखाई दे रहे हैं।

सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी हालात कुछ ऐसे ही बने हुए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान में कोई खास गिरावट की संभावना नहीं है। प्रदेश के कई इलाकों में लू चलने के आसार हैं, जो लोगों के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती है। गर्म हवाओं के थपेड़े दिन के साथ-साथ रात में भी राहत नहीं दे रहे हैं, जिससे लोगों की नींद और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

देश के अन्य हिस्सों में भी गर्मी का यही हाल है। राजस्थान के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है और कुछ जगहों पर यह 45 डिग्री तक जाने की आशंका जताई जा रही है। कोटा जैसे शहरों में पारा 42 डिग्री तक पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दिन और रात के तापमान में भारी अंतर भी देखा जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है।

वहीं, गुजरात में भी गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। अस्पतालों में ‘हीट वार्ड’ बनाए गए हैं ताकि लू के मरीजों का तुरंत इलाज किया जा सके। डिहाइड्रेशन के मामलों को देखते हुए ओआरएस कॉर्नर भी स्थापित किए गए हैं, जहां लोगों को मुफ्त में ओआरएस उपलब्ध कराया जा रहा है। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन गर्मी की गंभीरता को समझते हुए पहले से तैयारी कर रहा है।

हालांकि देश के कुछ हिस्सों में स्थिति अलग भी है। पूर्वोत्तर भारत में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं और गुवाहाटी में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। यह स्थिति बताती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज कितना भिन्न हो सकता है—कहीं लोग तपती गर्मी से जूझ रहे हैं तो कहीं बारिश और बाढ़ से।

इस भीषण गर्मी का असर सिर्फ दैनिक जीवन पर ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में गर्मी को देखते हुए भगवान का शीतल पेयों और फलों के रस से अभिषेक किया जा रहा है, ताकि भक्तों को भी कुछ राहत और आध्यात्मिक सुकून मिल सके। यह भारतीय संस्कृति का एक अनूठा पहलू है, जहां प्रकृति की परिस्थितियों के अनुसार परंपराओं में भी बदलाव किया जाता है।

गर्मी का यह प्रकोप केवल असुविधा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। लू लगना, डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर वे लोग जो लंबे समय तक धूप में काम करते हैं—जैसे मजदूर, रिक्शा चालक, डिलीवरी कर्मी—उनके लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति भी चिंताजनक है क्योंकि उनकी शारीरिक क्षमता इस तरह की गर्मी को सहन करने में कम होती है।

ऐसे में जरूरी है कि हम कुछ सावधानियां अपनाकर खुद को इस भीषण गर्मी से बचाएं। सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि दोपहर 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें। यदि बहुत जरूरी हो तो सिर को ढककर ही बाहर निकलें—छाता, टोपी या गमछे का उपयोग करें। शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है, इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। इसके साथ ही नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस जैसे पेय पदार्थों का सेवन करना फायदेमंद होता है।

खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। हल्का और सुपाच्य भोजन करें, जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो—जैसे फल, सलाद, दही आदि। तली-भुनी और भारी चीजों से परहेज करें क्योंकि ये शरीर में गर्मी बढ़ाती हैं। घर के अंदर भी ठंडक बनाए रखने के लिए खिड़कियों पर पर्दे लगाएं और दिन के समय उन्हें बंद रखें ताकि बाहर की गर्म हवा अंदर न आ सके।

बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। उन्हें धूप में खेलने या बाहर जाने से रोकें और समय-समय पर पानी पिलाते रहें। यदि किसी को चक्कर आना, तेज सिरदर्द, उल्टी या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।

कुल मिलाकर, देश इस समय भीषण गर्मी के दौर से गुजर रहा है, जो आने वाले दिनों में और भी तीव्र हो सकता है। प्रशासन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है, लेकिन व्यक्तिगत सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि हम समय रहते सतर्क हो जाएं और जरूरी उपाय अपनाएं, तो इस तपती गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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