मुंबई, 20 अप्रैल (वेब वार्ता)। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में मोहम्मद रफी और किशोर कुमार की आवाज ने जो जादू रचा, वह आज भी श्रोताओं के दिलों में जिंदा है। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म दोस्ताना का गीत ‘बने चाहे दुश्मन हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा’ दोस्ती की भावना का प्रतीक बन चुका है। खास बात यह है कि फिल्म के प्रदर्शित होने से पहले ही 31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी का निधन हो गया था।
रफी के निधन का असर संगीत जगत पर गहरा पड़ा था। अमित कुमार के अनुसार, रफी के निधन पर किशोर कुमार ने भावुक होकर उनके चरण पकड़ लिए थे और बच्चों की तरह रो पड़े थे। इसके बाद लंबे समय तक किशोर कुमार अपने कार्यक्रमों में रफी को श्रद्धांजलि देते रहे।
दोनों गायकों ने 1970 के दशक में कई यादगार युगल गीत दिए। यादों की बारात का शीर्षक गीत आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है, जिसे आर डी बर्मन ने संगीतबद्ध किया था और मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था। इसी फिल्म का गीत ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ भी समय के साथ अमर हो गया।
फिल्म परवरिश में भी रफी और किशोर की जोड़ी ने ‘हम प्रेमी, प्रेम करना जानें’ जैसे गीत से दर्शकों का दिल जीता। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना मुख्य भूमिकाओं में थे, और दोनों गायकों ने अपने-अपने अभिनेताओं के लिए स्वर दिया।
‘दोस्ताना’ फिल्म की बात करें तो इसे यश जौहर ने निर्माण किया था, जबकि निर्देशन राज खोसला ने किया। फिल्म में अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा और जीनत अमान प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए। यह फिल्म उस वर्ष की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही।
संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि मोहम्मद रफी और किशोर कुमार की युगल प्रस्तुतियां केवल गीत नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं। उनकी आवाज का जादू समय के साथ और भी गहरा होता गया है, जो आज भी नई पीढ़ी को उतना ही आकर्षित करता है जितना उस दौर में करता था।



