क्या पाकिस्तान ईरान पर हमला करेगा? सऊदी की चेतावनी

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वेब वार्ता | वाशिंगटन

मेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान की ओर से मिडिल ईस्ट में कतर से लेकर यूएई और सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया. ईरान के हमले को लेकर अरब, मुस्लिम देशों ने नाराजगी जताई है, बल्कि जवाबी कार्रवाई की भी चेतावनी दी. वहीं, सऊदी अरब के पाकिस्तान पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई का दबाव डालने के संकेत मिले हैं. एक रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है.

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ (एसएमडीए) जैसे रक्षा समझौते मौजूद हैं. इसके बावजूद सऊदी अरब में ईरानी हमलों पर इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया शांत बनी हुई है. न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी विशेषज्ञों के माध्यम से कनाडा को भेजे गए एक टीवी संदेश में, रियाद ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर वह इस्लामाबाद से कार्रवाई की उम्मीद करता है.

रिपोर्ट को लेकर खड़े हुए सवाल

पाकिस्तान की विदेश नीति से जुड़ी एक रिपोर्ट को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. द यूरेशियन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा कि दशकों से सऊदी अरब की ओर से वित्तीय और रणनीतिक समर्थन मिलने के बावजूद पाकिस्तान ईरान को ‘खुश करने’ की नीति अपनाए हुए है.

लेख में कहा गया है, ‘यह ध्यान देने योग्य है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के संबंध सात दशकों से अधिक पुराने हैं. सऊदी सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों की तैनाती वर्षों से एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में स्थापित रही है. इसके अलावा, सऊदी अरब में लाखों पाकिस्तानी नागरिक काम कर रहे हैं, जो इस्लामाबाद की विदेशी मुद्रा आय में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.’

रिपोर्ट में क्या बताया गया?

द यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान से बार-बार हमलों का सामना करने के बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने चेतावनी दी कि ईरानी आक्रामकता के सामने किंगडम का संयम ‘असीमित नहीं है’, जिसका अर्थ है कि सैन्य कार्रवाई अभी भी एक विकल्प हो सकता है. इस बीच अरब और इस्लामिक देशों ने एक संयुक्त बयान में तेहरान से अपनी आक्रामकता रोकने का आग्रह किया.

ईरानी राष्ट्रपति ने मांगी माफी

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 7 मार्च को सार्वजनिक रूप से पश्चिम एशिया के देशों के खिलाफ हुई आक्रामक कार्रवाइयों के लिए माफी मांगी. इसके बावजूद, रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले जारी रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तेहरान का उद्देश्य न केवल इजरायल को नुकसान पहुंचाना है, बल्कि पश्चिम एशिया के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी उनके महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर प्रभावित करना है.

युद्ध में सऊदी अरब, यूएई, कतर सबसे ज्यादा प्रभावित

युद्ध के दौरान सबसे अधिक प्रभावित खाड़ी देशों में सऊदी अरब, यूएई और कतर शामिल हैं, जबकि दोहा ने कथित तौर पर हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती जैसे ईरानी प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करने में धन खर्च किया है, जिसका उद्देश्य इजरायल पर लगातार दबाव बनाए रखना बताया गया है.

यूएई ने दी चेतावनी

इस बीच, यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अल जाबेर ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा संरचना पर हमले उनके संचालन को प्रभावित कर रहे हैं और तनाव बढ़ने पर इसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं. ईरान के बढ़ते हमलों के बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने कई ईरानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित किया है.

रिपोर्टों के अनुसार, यूएई में बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बासिज के सीक्रेट मेंबर्स शामिल हैं जो सरकार के खिलाफ अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

ऑनलाइन प्रोपेगेंडा कैंपेन चलाने का दावा

लेख में यह भी कहा गया है कि ईरानी ऑपरेटिव्स यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में पाकिस्तानी नागरिकों को भर्ती कर इन देशों और उनके नेतृत्व के खिलाफ ऑनलाइन प्रोपेगेंडा अभियान चलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इससे पहले, तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने एक खोजी रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान-आधारित नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई-आधारित ईरानी प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं.

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