नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), क्राइम डेस्क | वेब वार्ता
नोएडा में स्कूल बस की हैरान कर देने वाली लापरवाही का मामला 01 मार्च 2026 को सामने आया, जब यूकेजी (KG-2) में पढ़ने वाला 5 वर्षीय मासूम करीब 7 घंटे तक एसी स्कूल बस में बंद रहा। बस को स्कूल पहुंचने के बाद लगभग 25 किलोमीटर दूर सेक्टर-81 स्थित एक बड़े पार्किंग यार्ड में खड़ा कर दिया गया, जहां सैकड़ों ट्रक और बसें खड़ी थीं। बच्चे की नींद खुलने पर चारों ओर सन्नाटा था—न कोई सहपाठी, न शिक्षक, न कोई सहारा। उसने रोते-चिल्लाते दरवाजा पीटा, लेकिन बंद एसी बस के लॉक गेट्स के पीछे उसकी आवाज दब गई।
नोएडा में स्कूल बस की हैरान कर देने वाली लापरवाही: कैसे छूटा मासूम
रविवार सुबह बच्चा बस में बैठते ही सो गया था। रास्ते में बस खराब होने पर ड्राइवर और अटेंडेंट ने अन्य बच्चों को दूसरी बस में शिफ्ट कर दिया, लेकिन सोते हुए बच्चे की जांच नहीं की गई। स्कूल पहुंचकर शेष बच्चों को उतार लिया गया और बस को खाली समझकर यार्ड में खड़ा कर दिया गया।
दोपहर बाद जब बच्चे की नींद खुली, तो वह पूरी तरह अकेला था। भूख, प्यास और भय के बीच उसने मदद के लिए चीखा, लेकिन एसी कोच की सील बंद संरचना के कारण उसकी आवाज बाहर नहीं पहुंची।
पिता की 7 घंटे की बेचैन तलाश
शाम को स्कूल से बच्चे के न पहुंचने की जानकारी मिलने पर पिता ने खोजबीन शुरू की। उन्होंने स्कूल प्रशासन से संपर्क किया, जहां शुरुआत में जवाब मिला कि “बच्चा बस से उतर गया होगा।” लेकिन पिता ने हार नहीं मानी। वे सेक्टर-81 के यार्ड पहुंचे, जहां 600 ट्रक और 400 बसें खड़ी थीं।
पिता के अनुसार, “मैं हर बस का दरवाजा खटखटाता रहा। दिल में डर था कि कहीं मेरा बच्चा सांस लेने में तकलीफ न झेल रहा हो। आखिरकार शाम करीब 7 बजे एक बस से रोने की आवाज आई और मेरा बेटा मिला।”
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| घटना की अवधि | करीब 7 घंटे |
| स्थान | सेक्टर-81 पार्किंग यार्ड, नोएडा |
| खोज क्षेत्र | 600 ट्रक, 400 बसें |
| बच्चे की हालत | भूख, प्यास, मानसिक सदमा |
अस्पताल में भर्ती, जांच जारी
बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ऑब्जर्वेशन में रखा गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्चा अब खतरे से बाहर है, लेकिन मानसिक आघात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
स्कूल प्रशासन पर उठे सवाल
नोएडा में स्कूल बस की हैरान कर देने वाली लापरवाही के बाद स्कूल प्रबंधन ने बस ड्राइवर और अटेंडेंट को निलंबित कर दिया है। प्रिंसिपल ने लिखित माफी भी जारी की है, लेकिन अभिभावक प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
अभिभावकों का गुस्सा और प्रशासन की कार्रवाई
घटना के बाद सोशल मीडिया पर #SchoolBusSafety और #NoidaSchoolNegligence ट्रेंड करने लगे। अभिभावकों ने स्कूलों में सख्त सुरक्षा मानकों की मांग की है।
- हर बस में GPS और CCTV अनिवार्य हो
- दो अटेंडेंट की तैनाती
- बच्चों की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली
- अभिभावकों को रीयल-टाइम नोटिफिकेशन
डीएम ने स्कूल को नोटिस जारी कर जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस बस ड्राइवर और अटेंडेंट से पूछताछ कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पिता ने बच्चे को न खोजा होता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
पिता का कहना है, “मेरा बच्चा बच गया, लेकिन इस तरह की लापरवाही पर सख्त कानून बनने चाहिए।”
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