जासूसी के शक में डीआरडीओ गेस्ट हाउस का मैनेजर महेंद्र सिंह हिरासत में, पाकिस्तान के लिए भेजता था गोपनीय जानकारी

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जोधपुर, (वेब वार्ता)। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर सतर्कता का परिचय देते हुए एक संभावित जासूस को हिरासत में लिया है। जैसलमेर के चांदन गांव से डीआरडीओ (DRDO) गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र सिंह को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों के अनुसार, महेंद्र सिंह पर गुप्त सैन्य जानकारी सीमा पार भेजने का गंभीर आरोप है।

गेस्ट हाउस में ठहरते थे सैन्य वैज्ञानिक और अफसर

महेंद्र सिंह डीआरडीओ के जिस गेस्ट हाउस में तैनात था, वहां सैन्य परीक्षण से जुड़े वैज्ञानिकों और उच्च अधिकारी अक्सर रुकते हैं। माना जा रहा है कि महेंद्र इन अधिकारियों की गतिविधियों, योजनाओं और परीक्षणों से जुड़ी सूचनाएं पाकिस्तान तक पहुंचा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को उसके मोबाइल फोन से कई गोपनीय चैट और संदिग्ध संदेश मिले हैं, जो उसकी भूमिका को और अधिक संदिग्ध बनाते हैं।

लंबे समय से निगरानी में था महेंद्र सिंह

सुरक्षा एजेंसियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पिछले कई महीनों से महेंद्र सिंह पर नजर रखी हुई थी। उसके संचार के तरीकों और व्यवहार में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिलने के बाद उसे हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि चांदन गांव से जब उसे पकड़ा गया, उस समय उसके पास से कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ और दस्तावेज़ भी बरामद हुए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

पोकरण फायरिंग रेंज से जुड़ी जानकारी लीक होने का शक

सूत्रों के अनुसार, पोकरण फायरिंग रेंज जैसी संवेदनशील जगहों की जानकारी लीक होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा। यह इलाका भारत की रणनीतिक सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है और यहां से जुड़ी जानकारी अगर विदेशी हाथों में चली जाए, तो यह देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

पूछताछ जारी, हो सकते हैं बड़े खुलासे

फिलहाल महेंद्र सिंह से गहनता से पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। अब तक की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि वह सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स के माध्यम से सूचनाएं साझा करता था।

देश की सुरक्षा पर फिर मंडराया खतरा

यह घटना एक बार फिर देश की रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था और आतंरिक खतरों पर सवाल खड़े करती है। यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि सभी रक्षा संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की व्यापक पृष्ठभूमि जांच और नियमित निगरानी की जाए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते रोक लगाई जा सके।

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