Tuesday, February 17, 2026
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जिलाधिकारी ने रामगंगा में छोड़े 555 कछुए, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प – विगत वर्षों में सर्वाधिक संख्या

शाहजहाँपुर, रामनिवास शर्मा | वेब वार्ता 

शाहजहाँपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिला गंगा समिति, विश्व वन्यजीव कोष (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया) और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विकासखंड जलालाबाद के गोरा घाट पर रामगंगा नदी में कछुआ विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह और प्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार ने 555 बचाए गए कछुआ शावकों को नदी में छोड़ा। यह संख्या अब तक के सभी वर्षों में सर्वाधिक है।

कछुओं की नदी में वापसी से पारिस्थितिकी को मिली मजबूती

जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने कछुओं को नदी पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि कछुए नदियों की प्राकृतिक सफाईकर्ता होते हैं। ये जलकुंभियों, शैवाल और मृत जीवों को खाकर नदी को स्वच्छ रखते हैं। साथ ही भूजल स्रोतों के संरक्षण और जल संतुलन में भी इनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा, “कछुओं का संरक्षण नदी की सेहत और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है।”

प्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार ने इस मौके पर रामगंगा में पाई जाने वाली प्रमुख कछुआ प्रजातियों बगाटुर ढोंगोका और पंगशुरा टेटोरिया का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन प्रजातियों का संरक्षण न केवल जैव विविधता को बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि रामगंगा से गंगा तक की पूरी पारिस्थितिकी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

WWF और विशेषज्ञों ने साझा की पूरी प्रक्रिया

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के समन्वयक डॉ. मोहम्मद आलम ने रामगंगा से गंगा तक चल रहे संरक्षण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पर्यावरणीय प्रवाह, कृषि, जल प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।

डॉ. हरिमोहन मीना ने कछुआ संरक्षण की पूरी प्रक्रिया बताई। उन्होंने कहा कि अंडों को संरक्षित कर हैचिंग कराने से लेकर शावकों का स्वास्थ्य परीक्षण और विमोचन तक की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से की जाती है। इससे कछुआ प्रजातियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।

ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से मिली नई ऊर्जा

कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। स्थानीय लोग कछुआ संरक्षण के महत्व को समझते हुए इस प्रयास से जुड़े। संचालन डॉ. विनय कुमार सक्सेना ने किया। आभार डॉ. सुशील कुमार ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. गौरा चन्द्र दास, रामऔतार, विशाल रावत आदि का विशेष सहयोग रहा।

प्रमुख आंकड़े एक नजर में

विवरणआंकड़ा/विवरण
विमोचित कछुआ शावक555 (विगत वर्षों में सर्वाधिक)
स्थानगोरा घाट, रामगंगा नदी, जलालाबाद विकासखंड
मुख्य अतिथिजिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह
अन्य प्रमुखप्रभागीय वनाधिकारी सचिन कुमार, डॉ. मोहम्मद आलम, डॉ. हरिमोहन मीना
आयोजकजिला गंगा समिति, WWF इंडिया, वन विभाग
नदी संरक्षण की नई मिसाल

यह कार्यक्रम न केवल जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि ग्रामीणों में पर्यावरण जागरूकता फैलाने का भी सफल प्रयास रहा। जिलाधिकारी के नेतृत्व में शाहजहाँपुर जिला कछुआ संरक्षण और नदी पारिस्थितिकी के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। 555 कछुओं का विमोचन रामगंगा की सफाई और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मजबूत संदेश है।

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