एटा: ग्रामीणों की गौभक्ति ने बचाए 14 निराश्रित गोवंश, प्रधान-सचिव की उदासीनता पर सवाल—ग्रामीणों ने खुद जुटाया चंदा

एटा, सुनील यादव | वेब वार्ता

एटा जनपद के विकासखंड सकरौली अंतर्गत ग्राम पंचायत शकरौली के उपग्राम धर्मपुर में ग्रामीणों ने गौ संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की है। पशुधन प्रसार अधिकारी दीपक सिंह के नेतृत्व और ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से 14 निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित बचाकर बृहद गौ संरक्षण केंद्र जलेसर देहात पहुंचाया गया। यह पूरा अभियान ग्रामीणों की पहल पर चला। हर घर से चंदा एकत्र कर ट्रैक्टर किराए पर लिया गया, मोहरी (रस्सी) खरीदी गई और गोवंशों को सुरक्षित बांधकर एकत्र किया गया।

विकासखंड अधिकारी पीएस आनंद ने मौखिक रूप से पूर्ण सहयोग दिया और गौसेवा रथ (ट्रॉला) उपलब्ध कराया। श्री आनंद के बार-बार निर्देश देने के बावजूद पंचायत सचिव सुनील दिवाकर ने काफी देरी की, जिससे ग्रामीणों को लंबा इंतजार करना पड़ा। अंततः सचिव विकासखंड परिसर पहुंचे तब जाकर गौसेवा रथ उपलब्ध हुआ।

दुखद बात यह है कि इस पुनीत कार्य में ग्राम प्रधान पवन कुमार प्रजापति एवं पंचायत सचिव सुनील दिवाकर ने कोई आर्थिक या सक्रिय सहयोग नहीं दिया। जहां ग्रामीण अपनी जेब से खर्च कर गौमाता की सेवा कर रहे थे, वहीं जनप्रतिनिधि और पंचायत अधिकारी पूरी तरह उदासीन रहे। यह लापरवाही न केवल शर्मनाक है, बल्कि गौ संरक्षण जैसे राष्ट्रीय अभियान के प्रति उनकी संवेदनहीनता को उजागर करती है। ऐसे पदाधिकारियों से जनता को क्या उम्मीद की जा सकती है?

ग्रामवासियों ने इस सफल अभियान के लिए पशुधन प्रसार अधिकारी दीपक सिंह एवं विकासखंड अधिकारी पीएस आनंद का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

यह घटना साबित करती है कि जब अधिकारी और जनता मिलकर कार्य करें, तो बड़े लक्ष्य आसानी से प्राप्त हो सकते हैं। ग्रामीणों की गौभक्ति और एकजुटता सराहनीय है, जबकि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गौ संरक्षण अभियान में सभी की भागीदारी जरूरी है।

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