खुशियों की पाठशाला में बच्चों ने सीखी ब्लॉक प्रिंटिंग कला, राज्य संग्रहालय में 61 विद्यार्थियों ने दिखाया रचनात्मक कौशल

लखनऊ | राज्य डेस्क | वेब वार्ता

State Museum Lucknow Summer Workshop के अंतर्गत उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अधीन राज्य संग्रहालय, लखनऊ में आयोजित “खुशियों की पाठशाला” ग्रीष्मकालीन इंटरएक्टिव गतिविधियों की श्रृंखला में शनिवार को ब्लॉक प्रिंटिंग एक्टिविटी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच, कलात्मक अभिरुचि और पारंपरिक भारतीय कला विधाओं के प्रति जागरूकता विकसित करना था। इस गतिविधि में लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के 06 से 14 वर्ष आयु वर्ग के कुल 61 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और ब्लॉक प्रिंटिंग की विभिन्न तकनीकों को सीखते हुए अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)

  • राज्य संग्रहालय, लखनऊ में “खुशियों की पाठशाला” के तहत ब्लॉक प्रिंटिंग एक्टिविटी आयोजित हुई।
  • 06 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 61 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
  • सिटी मोंटेसरी स्कूल और लखनऊ पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
  • बच्चों ने पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
  • संस्कृति विभाग ने भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम जारी रखने की बात कही।

State Museum Lucknow Summer Workshop का उद्देश्य क्या रहा?

राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित “खुशियों की पाठशाला” का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें भारतीय कला, संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प से व्यावहारिक रूप से जोड़ना है। ब्लॉक प्रिंटिंग जैसी पारंपरिक कला के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक सोच विकसित करने, रंगों और डिजाइनों की समझ बढ़ाने तथा हस्तकौशल को निखारने का अवसर मिला।

ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान आयोजित इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को सीखने के साथ-साथ आनंददायक अनुभव भी प्रदान करती हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास, कल्पनाशीलता और टीम भावना का भी विकास होता है।

ब्लॉक प्रिंटिंग गतिविधि बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?ब्लॉक प्रिंटिंग भारत की पारंपरिक कला विधाओं में से एक है। इस तकनीक के माध्यम से बच्चे रंगों, आकृतियों और डिजाइन की समझ विकसित करते हैं। साथ ही उन्हें भारतीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को व्यवहारिक रूप में जानने का अवसर मिलता है, जिससे रचनात्मकता और सौंदर्यबोध का विकास होता है।

इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में सिटी मोंटेसरी स्कूल, लखनऊ एवं लखनऊ पब्लिक स्कूल, लखनऊ के कुल 61 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में ब्लॉक प्रिंटिंग की विभिन्न तकनीकों को समझा और अपने हाथों से आकर्षक कलात्मक डिजाइनों का निर्माण किया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पारंपरिक कला को आधुनिक रचनात्मकता के साथ जोड़ते हुए अनेक सुंदर प्रिंट तैयार किए। इससे उन्हें कला सीखने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति भी नई समझ विकसित करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख तथ्य

मुख्य बिंदुविवरण
आयोजकराज्य संग्रहालय, लखनऊ
विभागसंस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश
कार्यक्रमखुशियों की पाठशाला – ब्लॉक प्रिंटिंग एक्टिविटी
प्रतिभागी61 विद्यार्थी
आयु वर्ग06 से 14 वर्ष
विद्यालयसिटी मोंटेसरी स्कूल एवं लखनऊ पब्लिक स्कूल

प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर किया गया सम्मानितState Museum Lucknow Block Printing Workshop

कार्यक्रम के समापन अवसर पर राज्य संग्रहालय, लखनऊ के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए। उन्होंने अपने संबोधन में बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल ऐतिहासिक धरोहरों को प्रदर्शित करने का माध्यम ही नहीं बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और कला से जोड़ने का एक प्रभावी शैक्षिक मंच भी है। ऐसे आयोजन बच्चों में सीखने की जिज्ञासा और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं।

डॉ. मीनाक्षी खेमका के निर्देशन में हुआ सफल आयोजन

पूरे कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. मीनाक्षी खेमका, सहायक निदेशक (सज्जा कला) द्वारा किया गया। उनके निर्देशन एवं मार्गदर्शन में ब्लॉक प्रिंटिंग गतिविधि का सफल संचालन हुआ और प्रतिभागियों को कला की बारीकियों से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को चरणबद्ध तरीके से ब्लॉक प्रिंटिंग की प्रक्रिया समझाई गई, जिससे वे स्वयं कलात्मक डिजाइनों का निर्माण कर सके। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण ने बच्चों के सीखने के अनुभव को और अधिक प्रभावी बनाया।

ऐसी गतिविधियों का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है?रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे उनमें कला के प्रति रुचि बढ़ती है, आत्मविश्वास विकसित होता है तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सम्मान की भावना मजबूत होती है। संग्रहालय द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम बच्चों को सीखने का व्यावहारिक और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराते हैं।

भविष्य में भी जारी रहेंगी रचनात्मक गतिविधियां

राज्य संग्रहालय, लखनऊ ने बताया कि भविष्य में भी बच्चों एवं युवाओं के लिए इस प्रकार की शैक्षिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जाएगा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय कला, संस्कृति और विरासत से जोड़ते हुए उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है।

संस्कृति विभाग का मानना है कि संग्रहालय केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, रचनात्मकता और सांस्कृतिक जागरूकता का सशक्त माध्यम भी है। “खुशियों की पाठशाला” जैसी पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

 

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