रामपुर | अजय कुमार | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद में आयोजित गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्होंने गोसंरक्षण, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी नीतियों को लेकर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि गोमाता का संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि भारतीय कृषि व्यवस्था, पर्यावरण संतुलन और सांस्कृतिक विरासत से भी सीधा जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
- रामपुर में गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा का भव्य स्वागत।
- जगद्गुरु शंकराचार्य ने गोसंरक्षण को राष्ट्रीय दायित्व बताया।
- देशी गाय, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर दिया विशेष जोर।
- गोसंरक्षण को लेकर सरकारी नीतियों पर उठाए सवाल।
- 81 दिवसीय यात्रा 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजर रही है।
गोसंरक्षण को बताया भारतीय संस्कृति की आधारशिला
अपने संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की संस्कृति में गाय का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिंदू परिवार में पहली रोटी गाय को समर्पित करने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और समाज के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। उनके अनुसार गोवंश संरक्षण भारतीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा है और इसे केवल धार्मिक विषय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गोमाता भारतीय कृषि व्यवस्था की रीढ़ रही है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहायक है, बल्कि रासायनिक खेती पर निर्भरता भी कम कर सकती है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की।
देशी गायों की घटती संख्या पर जताई चिंता
शंकराचार्य ने दावा किया कि देश में देशी नस्ल की गायों की संख्या लगातार कम हो रही है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। यदि गोआधारित कृषि प्रणाली को पुनर्जीवित किया जाए तो खेती अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सकती है।
सरकारी नीतियों पर जताई नाराजगी
उन्होंने विभिन्न सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए दावा किया कि गोसंरक्षण के लिए अपेक्षित कानूनी और प्रशासनिक कदम नहीं उठाए गए हैं। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर सहित कुछ क्षेत्रों में गोसंरक्षण से जुड़े कानूनों में परिवर्तन किए गए, जिससे गोवंश संरक्षण प्रभावित हुआ।
हालांकि, कार्यक्रम के दौरान इन दावों पर संबंधित सरकारों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
राजनीति नहीं, गोसंरक्षण है उद्देश्य
शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि वे केवल गोमाता के संरक्षण और भारतीय संस्कृति की रक्षा के पक्ष में अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से गोसंरक्षण के मुद्दे को आगे बढ़ाने तथा समाज में जनजागरण अभियान चलाने की अपील की।
सभा में दिलाया गया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का उच्चारण करते हुए गोसंरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने गोवंश संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संवर्धन के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का भी संकल्प व्यक्त किया।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| कार्यक्रम | गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा |
| स्थान | रामपुर, उत्तर प्रदेश |
| मुख्य वक्ता | जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती |
| मुख्य संदेश | गोसंरक्षण, जैविक खेती एवं जनजागरण |
| यात्रा अवधि | 81 दिन |
| समापन | 24 जुलाई, लखनऊ |
धर्म देव गुप्ता को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस अवसर पर विधानसभा क्षेत्र में जनजागरण अभियान को गति देने के लिए धर्म देव गुप्ता को स्थानीय समिति के गठन तथा “एक नोट अभियान” के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही गोवंश संरक्षण के लिए विभिन्न क्षेत्रों में गोधाम निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
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