
खेत देखकर घर लौटते समय फिसला पैर, पलक झपकते ही नदी की धार में खो गया सचिन; गोताखोरों ने निकाला शव, पुलिया की ऊंचाई पर उठे सवाल
लक्ष्मीकान्त पाठक। वेबवार्ता
हरदोई। शाम की ओर खेतों से लौटते कदमों को शायद यह आभास भी नहीं था कि घर की चौखट तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी का सफर थम जाएगा। शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के मिठनापुर गांव निवासी करीब 35 वर्षीय सचिन कुमार सिंह पुत्र बाबू सिंह खेत देखकर घर लौट रहे थे। सुखेता नदी पर बनी पुलिया से गुजरते वक्त बाढ़ के पानी के बीच अचानक उनका पैर फिसला और अगले ही पल वह नदी की गहराई में समा गए।अचानक हुए इस हादसे से मौके पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया और स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया। गोताखोरों ने नदी में उतरकर तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद सचिन को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक नदी उनकी सांसें छीन चुकी थी। एक परिवार की उम्मीदें देखते ही देखते मातम में बदल गईं।
पानी में डूबी पुलिया और व्यवस्था से जुड़ा सवाल
ग्रामीणों के अनुसार सुखेता नदी पर बनी यह पुलिया दशकों पुरानी है और इन दिनों बाढ़ के पानी में डूबी हुई है। नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद इसी रास्ते से ग्रामीणों का आवागमन होता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने या इसे बाढ़ के दौरान सुरक्षित बनाने की आवश्यकता महसूस की जाती रही, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ।आज नदी ने एक जिंदगी निगल ली तो पुरानी पुलिया की खामोशी भी सवालों में बदल गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिया पर्याप्त ऊंची होती और बाढ़ के समय सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था होती, तो शायद सचिन के साथ हुआ यह हादसा टाला जा सकता था।
सचिन की मौत केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है, बल्कि बाढ़ के दिनों में ग्रामीण रास्तों की सुरक्षा की उस चिंता को भी सामने लाती है, जो हर वर्ष पानी उतर जाने के साथ दब जाती है। ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि इस हादसे के बाद पुलिया की स्थिति पर जिम्मेदार विभाग गंभीरता से ध्यान देगा और भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है