लक्ष्मीकान्त पाठक, लखनऊ/हरदोई, 18 जून (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत स्थानीय निकाय विभाग ने हरदोई जनपद में तैनात दो अधिशासी अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप हैं, जिनकी विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
निदेशक स्थानीय निकाय अनुज कुमार झा ने नगर पालिका परिषद शाहाबाद में तैनात अधिशासी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर को रिश्वत लेने के आरोपों के आधार पर निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई अपर जिलाधिकारी (न्यायिक)/प्रभारी अधिकारी (स्थानीय निकाय), हरदोई तथा नगर पालिका परिषद शाहाबाद के अध्यक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्टों के आधार पर की गई है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी संस्थित कर दी गई है।
इसी क्रम में नगर पालिका परिषद बिलग्राम में तैनात अधिशासी अधिकारी नीलाव शल्या के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की गई है। उनके खिलाफ एक ठेकेदार से भुगतान के एवज में कथित रूप से कमीशन एवं रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने तथा एफआईआर दर्ज होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी प्रारंभ कर दी गई है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी हरदोई एवं संबंधित अधिकारियों की आख्या के आधार पर की गई।
निदेशक स्थानीय निकाय अनुज कुमार झा ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप स्थानीय निकायों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। भ्रष्टाचार अथवा वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर दृढ़ता से कार्य कर रही है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा तथा प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद द्वारा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुचिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं। स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता अथवा पद के दुरुपयोग से संबंधित मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
हरदोई जनपद के दोनों मामलों में उपलब्ध तथ्यों एवं प्राप्त आख्या के आधार पर की गई इस त्वरित कार्रवाई को सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई की व्यापक चर्चा है और इसे स्थानीय निकायों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।




