अपनी थाली पहल से कैंसर मरीजों के परिजनों को बड़ी राहत, KSSSCI में पहले दिन 360 लोगों को मिला निःशुल्क रात्रि भोजन

लखनऊ | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

Apni Thali Initiative के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान (KSSSCI) में कैंसर मरीजों के परिजनों के लिए निःशुल्क रात्रि भोजन सेवा की शुरुआत हो गई है। RAVC Foundation, KSSSCI और शारदा वेलफेयर सोसायटी की संयुक्त पहल के तहत पहले ही दिन उपचाराधीन मरीजों के 360 तीमारदारों को गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। यह संख्या प्रारंभिक अनुमान से काफी अधिक रही और इस मानवीय पहल को परिजनों का व्यापक समर्थन मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के चिकित्सकीय अधीक्षक डॉ. वरुण विजय ने पहली थाली परोसकर किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एम.एल.बी. भट्ट तथा मुख्य चिकित्सकीय अधीक्षक डॉ. विजेंद्र कुमार के उस संकल्प को दोहराया कि कैंसर उपचार केवल मरीज तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके साथ दिन-रात रहने वाले परिजनों की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)

  • लखनऊ के KSSSCI में ‘अपनी थाली’ कार्यक्रम की शुरुआत।
  • पहले ही दिन 360 मरीजों के परिजनों ने भोजन ग्रहण किया।
  • RAVC Foundation, KSSSCI और शारदा वेलफेयर सोसायटी की संयुक्त पहल।
  • हर दिन शाम 7 से 9 बजे तक मिलेगा पौष्टिक रात्रि भोजन।
  • सिर्फ एक रुपये के स्वैच्छिक योगदान पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
  • FSSAI मानकों के अनुरूप भोजन तैयार और वितरित किया जाएगा।

Apni Thali Initiative की शुरुआत क्यों की गई?

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का उपचार कई बार महीनों तक चलता है। इस दौरान मरीज के साथ उसका परिवार भी लगातार अस्पताल में रहता है। अस्पताल मरीज को भोजन उपलब्ध कराता है, लेकिन अधिकांश मामलों में तीमारदारों को भोजन बाहर से खरीदना पड़ता है। लंबे समय तक महंगा और असंतुलित भोजन आर्थिक बोझ के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा करता है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए RAVC Foundation ने ‘अपनी थाली’ की अवधारणा तैयार की, जिसका उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं बल्कि मरीज के साथ खड़े परिवार को सम्मान और सहयोग देना है। यह पहल इस विचार पर आधारित है कि बीमारी का सामना पूरा परिवार करता है और देखभाल का दायरा भी उसी अनुपात में होना चाहिए।

कैंसर मरीजों के परिजनों के लिए यह पहल क्यों महत्वपूर्ण है?अस्पतालों में कई तीमारदार सप्ताहों और महीनों तक मरीज के साथ रहते हैं। आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव और भोजन की अनिश्चित व्यवस्था उनके स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। ‘अपनी थाली’ इस समस्या का स्थायी समाधान प्रस्तुत करती है, जिससे परिजन सम्मानपूर्वक पौष्टिक भोजन प्राप्त कर सकें और मरीज की देखभाल पूरी ऊर्जा के साथ कर सकें।

KSSSCI ने कैसे निभाई महत्वपूर्ण भूमिका?

कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान ने इस परियोजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराईं। संस्थान ने भोजन वितरण के लिए डाइनिंग स्पेस, स्टील के बर्तन, स्वच्छ पेयजल, बैठने की व्यवस्था तथा दैनिक समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की व्यवस्था की है।

संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एम.एल.बी. भट्ट के नेतृत्व में यह स्पष्ट किया गया कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवा केवल उपचार तक सीमित नहीं रह सकती। मरीज के साथ रहने वाले परिवार की देखभाल भी उपचार प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है।

संस्थान का मानना है कि यदि तीमारदार स्वस्थ, संतुलित और मानसिक रूप से मजबूत रहेंगे तो मरीज के उपचार और मनोबल पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यही सोच इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता है।

RAVC Foundation ने कैसे तैयार किया यह मॉडल?

RAVC Foundation, RAVC Group की सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) शाखा है। संस्था का उद्देश्य समाज के उन वर्गों तक सहायता पहुंचाना है जो अक्सर स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों से जूझते हैं। ‘अपनी थाली’ इसी सोच का परिणाम है।

Foundation ने इस पूरी परियोजना की अवधारणा विकसित की, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई तथा विभिन्न संस्थाओं को एक मंच पर लाकर इसे स्थायी स्वरूप दिया। संस्था का मानना है कि व्यवसाय केवल लाभ अर्जित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

RAVC Group भारत के विभिन्न राज्यों में सोलर EPC, IPP, C&I तथा O&M क्षेत्रों में कार्यरत है और अपने वार्षिक लाभ का एक निर्धारित हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित करता है। इसी दर्शन के तहत RAVC Foundation कार्य कर रहा है।

शारदा वेलफेयर सोसायटी संभाल रही है संचालन

इस कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी शारदा वेलफेयर सोसायटी को सौंपी गई है। संस्था FSSAI के खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप भोजन तैयार कर निर्धारित समय पर वितरण सुनिश्चित कर रही है।

भोजन तैयार करने के लिए प्रशिक्षित शेफ की देखरेख में रसोई संचालित की जा रही है। संस्था प्रतिदिन ताजा भोजन तैयार कर समय पर परोसने के साथ-साथ स्वच्छता और गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रख रही है।

इसके अतिरिक्त यह पहल स्थानीय स्तर पर विशेष रूप से महिलाओं और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी योगदान दे रही है।

एक रुपये का योगदान क्यों रखा गया?

‘अपनी थाली’ की सबसे अनूठी विशेषता इसका सम्मान आधारित मॉडल है। यहां भोजन दान के रूप में नहीं बल्कि सहभागिता की भावना से उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्येक तीमारदार को केवल एक रुपये का स्वैच्छिक योगदान देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

यदि कोई व्यक्ति यह राशि देने में सक्षम नहीं है तो भी उसे भोजन से वंचित नहीं किया जाएगा। यह एक रुपया आर्थिक योगदान नहीं बल्कि आत्मसम्मान और साझेदारी का प्रतीक माना गया है।

पहले दिन उम्मीद से अधिक मिला सहयोग

मुख्य बिंदुविवरण
कार्यक्रमअपनी थाली
स्थानKSSSCI, लखनऊ
शुरुआत27 जून 2026
पहले दिन लाभार्थी360 परिजन
नियमित क्षमता200-250 भोजन प्रतिदिन
समयशाम 7:00 बजे से 9:00 बजे
सहयोगी संस्थाएंRAVC Foundation, KSSSCI, शारदा वेलफेयर सोसायटी

Apni Thali Initiative KSSSCI Launch1समाज में करुणा आधारित स्वास्थ्य सेवा का नया मॉडल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में केवल मरीजों का उपचार ही पर्याप्त नहीं है। परिवार की शारीरिक और मानसिक स्थिति भी उपचार के परिणामों को प्रभावित करती है। ऐसे में ‘अपनी थाली’ जैसी पहल भविष्य में देश के अन्य सरकारी और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

इस कार्यक्रम की सफलता इस बात का संकेत है कि सरकारी संस्थान, सामाजिक संगठन और कॉर्पोरेट क्षेत्र मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं में नई संवेदनशीलता जोड़ सकते हैं। पहले ही दिन 360 लोगों तक पहुंचना इस पहल की उपयोगिता और आवश्यकता दोनों को स्पष्ट करता है।

इस पहल का आगे क्या प्रभाव पड़ सकता है?यदि ‘अपनी थाली’ मॉडल इसी तरह सफल रहता है तो इसे प्रदेश और देश के अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों में भी लागू किया जा सकता है। इससे हजारों मरीजों के परिजनों को आर्थिक राहत मिलेगी, बेहतर पोषण मिलेगा और अस्पतालों में मानवीय स्वास्थ्य सेवा का नया मानक स्थापित होगा।

कार्यक्रम में साझा किए गए प्रमुख विचार

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं में केवल चिकित्सा सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार की भावनात्मक, सामाजिक और पोषण संबंधी आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। ‘अपनी थाली’ इसी सोच का परिणाम है, जिसमें सहायता को दान नहीं बल्कि सम्मानजनक सहभागिता के रूप में देखा गया है।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संस्थान, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से इस बात का संकल्प लिया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इलाज की लंबी प्रक्रिया के दौरान उन्हें भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए संघर्ष न करना पड़े।

निदेशक प्रो. (डॉ.) एम.एल.बी. भट्ट ने क्या कहा?

संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) एम.एल.बी. भट्ट ने कहा कि KSSSCI की प्रतिबद्धता केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है। किसी भी मरीज के स्वस्थ होने की प्रक्रिया उसके परिवार की मानसिक और शारीरिक स्थिति से भी जुड़ी होती है। ऐसे में अस्पताल का प्रयास है कि मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों को भी सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि पहले ही दिन 360 परिजनों का इस पहल से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि ऐसी व्यवस्था की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

RAVC Foundation का विजन

RAVC Group के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राम अनुज वर्मा ने कहा कि व्यवसाय और समाज एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। किसी भी संस्था का दायित्व केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि उसे समाज को भी सार्थक रूप से वापस देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि RAVC Group का मूल सिद्धांत “Real Asset Value Creation” है, जबकि RAVC Foundation “Real Work, Real Impact” के दर्शन पर कार्य करता है। ‘अपनी थाली’ केवल भोजन वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में लोगों के साथ सम्मानपूर्वक खड़े रहने का प्रयास है।

शारदा वेलफेयर सोसायटी की भूमिका

शारदा वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अतुल तिवारी ने कहा कि संस्था लंबे समय से जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने का कार्य कर रही है। KSSSCI में ‘अपनी थाली’ कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी मिलना संस्था के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने बताया कि संस्था यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक दिन गुणवत्तापूर्ण, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन निर्धारित समय पर प्रत्येक लाभार्थी तक पहुंचे। पहले दिन 360 लोगों तक भोजन पहुंचाना पूरी टीम के लिए प्रेरणादायक अनुभव रहा।

स्वास्थ्य सेवाओं में सामाजिक सहभागिता का उदाहरण

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और निजी क्षेत्र की साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। ‘अपनी थाली’ जैसी पहल इस दिशा में एक व्यवहारिक मॉडल प्रस्तुत करती है, जिसमें प्रशासन, सामाजिक संस्था और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व एक साझा उद्देश्य के लिए कार्य कर रहे हैं।

इस पहल से न केवल मरीजों के परिजनों को आर्थिक राहत मिलेगी बल्कि अस्पतालों में मानवीय मूल्यों पर आधारित स्वास्थ्य सेवा संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी। यदि यह मॉडल सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है तो भविष्य में इसे उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में भी लागू किया जा सकता है।

 

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