गढ़चिरौली में मतदान, ड्रोन, हेलीकॉप्टरों से रखी जा रही नजर, नक्सलियों से निपटने के लिए हजारों जवान तैनात

विदर्भ, 15 अप्रैल (वेब वार्ता)। विदर्भ के गढ़चिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र में बुलेट और बैलेट के बीच संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है। नक्सलियों ने मतदान करने पर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है। वहीं, लाल आतंक से निपटने के लिए प्रशासन भी मुस्तैद हो गया है। गढ़चिरोली पुलिस छावनी में तब्दील हो गई है।

मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने के लिए गढ़चिरोली में 130 ड्रोन और 6 एमआई 17 हेलिकॉप्टर्स, 180 सोर्टीज तैनात किए जाएंगे। इसकी निगहबानी में 19 अप्रैल को यहां चुनाव सम्पन्न कराए जाएंगे। नक्सल विरोधी ऑपरेशन के पुलिस महानिदेशक (डीजी) संदीप पाटिल और डीआईजी गढ़चिरोली रेंज अंकित गोयल जिला मुख्यालय में कैंप कर रहे हैं।

सीएपीएफ की 47 कंपनियां नक्सलग्रस्त इलाके में तैनात

गढ़चिरोली के हर इलाके में हेलिकॉप्टर से निगरानी की जा रही है। जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नीलोत्पल ने बताया कि 19 अप्रैल को सेंट्रल आर्म्स पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के 15000 हजार जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल, सीएपीएफ की 47 कंपनियां नक्सलग्रस्त इलाके में हैं जबकि 40 कंपनियां बाहरी इलाके में तैनात की गई है। वहीं, मतदान के दिन 6 एमआई-17 हेलिकॉप्टर, 180 सोर्टीज से पूरे इलाके की निगहबानी की जाएगी जबकि किसी भी स्थिति में मेडिकल सुविधा के लिए एक एयर एंबुलेंस भी तैनात रखा जाएगा।

माओवादी आतंक के साये में चार विस क्षेत्र

गढ़चिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र की चार विधानसभाओं में माओवादी आतंक का साया मंडरा रहा है। खासतौर से गढ़चिरौली, आरमोरी, सिरोंचा और गोंदिया जिले की आमगांव विधानसभा नक्सल प्रभावित है। इसके चलते इन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भामरागढ़, पेरीमिली, धनोरा, पेंड्री, कासनसुर, गट्टा, लाहिड़ी, बिनागुंडा सहित उत्तर और दक्षिण गढ़चिरौली के अन्य दूरदराज के इलाकों में कोई चुनावी हलचल नहीं है। इससे इस क्षेत्र के आदिवासी खौफ में हैं।

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