हीरक जयंती पर 17 फरवरी को विश्वविद्यालय प्रदान करेगा अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कार

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गोरखपुर, (वेब वार्ता)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अनुसंधान उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कार स्थापित किए गए हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य शिक्षकों और शोध विद्वानों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों के लिए पहचान और प्रोत्साहन देना है। यह पहल विश्वविद्यालय के हीरक जयंती वर्ष में आरंभ की गई है, जो इसे एक विशेष उपलब्धि बनाती है।

पुरस्कारों को क्वारटाइल रैंकिंग (Q1-Q4) के आधार पर पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिसमें प्लेटिनम पुरस्कार (Q1 जर्नल्स – शीर्ष 25%)11, 000/- प्रति प्रकाशन (केवल प्रथम और/या संबंधित लेखक, जिनकी संबद्धता विश्वविद्यालय से हो), डायमंड पुरस्कार (Q2 जर्नल्स – अगले 25% 7, 000/- प्रति प्रकाशन, गोल्ड पुरस्कार (Q3 जर्नल्स – अगले 25%) 5, 000/- प्रति प्रकाशन, सिल्वर पुरस्कार (Q4 जर्नल्स – निचले 25%) 3, 000/- प्रति प्रकाशन और ब्रॉन्ज पुरस्कार (Q1-Q4 जर्नल्स में सह-लेखक के रूप में योगदान) प्रशंसा पत्र/योग्यता प्रमाण पत्र मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उत्कृष्ट शोधकर्ता पुरस्कार संकाय सदस्यों की शोध गतिविधियों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर दिया जाएगा, जिसमें Q1-Q4 जर्नल्स में प्रकाशन, पेटेंट (प्रकाशित या स्वीकृत), प्रकाशित पुस्तकें और स्वीकृत शोध परियोजनाएं शामिल होंगी। इस पुरस्कार के तहत 21, 000/- की नकद राशि और विशेष मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। शोध एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा इन पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं, जिनमें 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक के शोध प्रकाशनों एवं उपलब्धियों को शामिल किया गया है। एक विशेषज्ञ समिति ने इन प्रविष्टियों का मूल्यांकन कर चयन किया है।

17 फरवरी को होगा पुरस्कार वितरण समारोह

पुरस्कार वितरण समारोह 17 फरवरी 2025 को अपराह्न 3 बजे विश्वविद्यालय के संवाद भवन में आयोजित किया जाएगा। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि अनुसंधान उत्कृष्टता विश्वविद्यालय की पहचान को संवारता है और हमारे शिक्षकों एवं शोधार्थियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाता है। यह पुरस्कार न केवल उत्कृष्ट अनुसंधान को पहचान दिलाएंगे, बल्कि शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले प्रकाशनों के लिए प्रेरित भी करेंगे। विश्वविद्यालय का लक्ष्य नवाचार और अनुसंधान में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है, जिससे न केवल अकादमिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी बल्कि समाज को भी लाभ मिलेगा।

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