भोपाल में ईरान प्रतिनिधि का बयान: ट्रंप-नेतन्याहू की निजी जंग, खामेनेई का भारत से जुड़ाव

-आमिर खान

भोपाल, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। कोहेफिजा क्षेत्र में आयोजित हुए इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसे में सामाजिक एकता, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया गया। आयोजन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग तिरंगा लेकर शामिल हुए। वहीं कुछ छोटे बच्चे फिलिस्तीन के झंडे वाली टी-शर्ट पहने नजर आए, जिसके पिछले हिस्से में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर की तस्वीर छपी थी। मौलाना इलाही ने कहा कि यह युद्ध ईरान ने नहीं छेड़ा, बल्कि यह डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की निजी जंग है। इससे न अमेरिका को फायदा है, न इजराइल को।

अमेरिका-इजरायल की आलोचना की
अपने संबोधन में मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती आपसी सहयोग और भाईचारे में ही निहित है। साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और इंसानियत के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने अपने विचार रखते हुए अमेरिका और इजरायल की नीतियों की आलोचना की और कहा कि विश्व में शांति और न्याय की स्थापना के लिए सभी को एकजुट होना होगा। इस मौके पर अलग-अलग धर्मों के लोग और प्रतिनिधि भी जलसे में शामिल हुए इससे सांप्रदायिक सौहार्द भी देखने को मिला।

भारत से रहा सुप्रीम लीडर का गहरा जुड़ाव
अपने संबोधन में मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद यह भी कहा कि अयातुल्लाह अली खामेनेई का भारत से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने भारत के इतिहास और साहित्य में विशेष रुचि ली और कई पुस्तकों का अध्ययन किया। खामेनेई ने 250 किताबें लिखी जिसमें दो किताब तो भारत पर लिखी हैं। भारत के इतिहास को समझने के लिए उन्होंने 22 किताबों का अध्ययन भी किया। खासतौर पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक “डिस्कवरी ऑफ इंडिया” से वे काफी प्रभावित थे। वह समय-समय पर युवाओं से उस पुस्तक को पढ़ने का भी आव्हान करते थे। उन्हे भारत के प्रति काफी लगाव था जब भी उनसे कोई भारत देश का प्रतिनिधि मिलता था वह भारतीय लेखकों साहित्यकारों और इतिहासकारों के बारे में विस्तार से चर्चा करते थे।

15 मिनट की मुलाकात डेढ़ घंटे चली
उन्होंने एक रोचक वाक्या बताते हुए कहा कि एक बार भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनाई से मिलने गए थे। मिलने के लिए सिर्फ 15 मिनट का समय मुकर्रर हुआ था, लेकिन दोनों के बीच जब बातचीत शुरू हुई तो देखते ही देखते डेढ़ घंटा बीत गया। अली खामेनाई ने बातचीत के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन और परिवार से जुड़ी कई बातें साझा की जिसको सुनकर पूर्व प्रधानमंत्री भी उस समय आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने मुलाकात के बाद कहा कि जो जानकारी उन्हें आज बताई गई वह तो उन्हें भी पहले पता नहीं थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

More articles