बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की संदिग्ध मौत, आपसी संघर्ष की आशंका

उमरिया, 11 मई (वेब वार्ता)। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली परिक्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। पश्चिम बगदरी बीट स्थित ढमढमा कैंप क्षेत्र में गश्ती के दौरान एक बाघ मृत अवस्था में मिला है। प्रारंभिक जांच में बाघ की मौत आपसी संघर्ष के कारण होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद वन विभाग ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार पश्चिम बगदरी बीट के ढमढमा कैंप में तैनात सुरक्षा श्रमिकों ने देर रात जंगल से बाघों की तेज गर्जना और संघर्ष जैसी आवाजें सुनीं। इसके बाद कर्मचारियों ने तत्काल वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही गश्ती दल को मौके पर रवाना किया गया और क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया।

वन अमले ने काफी देर तक जंगल में खोजबीन की, जिसके बाद एक बाघ मृत अवस्था में पड़ा मिला। घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक निरीक्षण किया, जिसमें बाघ के शरीर पर गंभीर चोटों और हमले के निशान पाए गए। प्रथम दृष्टया यह मामला बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर हुए संघर्ष से जुड़ा माना जा रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार राहत की बात यह है कि मृत बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। इससे शिकार या तस्करी जैसी आशंकाओं को फिलहाल खारिज किया जा रहा है। बावजूद इसके विभाग किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रहा है और हर पहलू से जांच की जा रही है।

घटनास्थल को तत्काल सील कर सुरक्षा घेरा बना दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य प्रभावित न हों। जांच को आगे बढ़ाने के लिए हाथी गश्ती दल, डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर टीम को भी मौके पर बुलाया गया है। वन विभाग की टीमें आसपास के जंगलों में संघर्ष के अन्य संकेतों और गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले में कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन और मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है। बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि एक बार फिर बाघ की मौत की इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग अब इस मामले की हर स्तर पर निगरानी कर रहा है।

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