झीरम घाटी बयान पर कांग्रेस का सख्त एक्शन: पूर्व वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को 6 साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित

रायपुर, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

झीरम घाटी नक्सली हमले के संदर्भ में दिए गए विवादास्पद बयान के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हलचल मच गई है। पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अपने पूर्व वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इससे पहले उन्हें प्रवक्ता पद से भी हटा दिया गया था।

जानकारी के अनुसार विकास तिवारी ने झीरम घाटी कांड को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के नार्को टेस्ट की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने उस समय के भाजपा प्रदेश प्रभारी जेपी नड्डा का भी नार्को टेस्ट कराने की बात कही थी। उनके इस बयान से पार्टी में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना गया बयान

पार्टी नेतृत्व ने इस बयान को अनुशासन के खिलाफ मानते हुए विकास तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तिवारी ने नोटिस का लिखित जवाब भी प्रस्तुत किया, लेकिन पार्टी को उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं लगा।

इसके बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी मलकीत सिंह गेंदू की ओर से जारी आदेश में विकास तिवारी को कांग्रेस पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित करने की कार्रवाई की गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह फैसला संगठनात्मक मर्यादाओं के उल्लंघन और अनुशासन बनाए रखने के लिए लिया गया है।

झीरम घाटी कांड का संक्षिप्त इतिहास

झीरम घाटी नक्सली हमला 25 मई 2013 को हुआ था, जिसमें कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन बघेल सहित कई बड़े नेता शहीद हो गए थे। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया। विकास तिवारी के बयान को पार्टी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अनुचित और संगठन विरोधी माना है।

प्रमुख तथ्य एक नजर में

विवरणजानकारी
कार्रवाईकांग्रेस से 6 वर्ष के लिए निष्कासित
कारणझीरम घाटी कांड पर विवादास्पद बयान
बयान में मांगभूपेश बघेल, कवासी लखमा और जेपी नड्डा का नार्को टेस्ट
आदेश जारीकर्ताजनरल सेक्रेटरी मलकीत सिंह गेंदू
पूर्व कार्रवाईप्रवक्ता पद से हटाया गया
वर्तमान स्थितिपार्टी से पूरी तरह अलग
निष्कर्ष: पार्टी अनुशासन पर कांग्रेस का सख्त रवैया

विकास तिवारी की निष्कासन कार्रवाई कांग्रेस द्वारा अपने संगठन में अनुशासन और एकता बनाए रखने की मंशा को दर्शाती है। झीरम घाटी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी लाइन से अलग बयान देना अब भारी पड़ सकता है। यह कदम प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक एकजुटता और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया बड़ा फैसला माना जा रहा है।

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