नई दिल्ली, 16 मई (वेब वार्ता)। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) की दरों में एक बार फिर बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से 15 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 16 मई से प्रभावी हो गई हैं। इस संशोधन में सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोल पर पहली बार एसएईडी लागू किया जाना माना जा रहा है।
सरकार के नए फैसले के अनुसार अब पेट्रोल के निर्यात पर तीन रुपये प्रति लीटर एसएईडी लगाया जाएगा। वहीं डीजल पर यह शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन पर 16 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। तीनों ईंधनों पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर शून्य रखा गया है। हालांकि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
हर दो सप्ताह में तय होती हैं दरें
सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की औसत कीमतों के आधार पर हर दो सप्ताह में एसएईडी की समीक्षा करती है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तब रिफाइनरियों के लिए निर्यात अधिक लाभदायक हो जाता है। ऐसी स्थिति में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसी को नियंत्रित करने के लिए सरकार निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाती है, ताकि कंपनियां घरेलू बाजार की आपूर्ति बनाए रखें। वहीं जब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आती है तो शुल्क भी कम कर दिया जाता है।
पश्चिम एशिया संकट के बाद शुरू हुई व्यवस्था
यह व्यवस्था 27 मार्च से लागू की गई थी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पहली बार यह शुल्क लगाया गया था।
अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए थे। उस समय सरकार ने डीजल पर एसएईडी बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। इसके बाद एक मई को कीमतों में नरमी आने पर डीजल पर शुल्क घटाकर 23 रुपये और एटीएफ पर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।
अब नई समीक्षा में डीजल पर शुल्क घटाकर 16.5 रुपये और एटीएफ पर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे निर्यात क्षेत्र को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
पेट्रोल पर पहली बार लगा शुल्क
इस बार की समीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पेट्रोल पर पहली बार एसएईडी लगाया जाना है। अब तक पेट्रोल के निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं था, लेकिन सरकार ने तीन रुपये प्रति लीटर शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने के बावजूद पेट्रोल निर्यात अभी भी रिफाइनरियों के लिए लाभकारी बना हुआ है। इसी कारण सरकार ने पेट्रोल को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल करने का फैसला लिया है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता संतुलित बनी रहेगी और वैश्विक अस्थिरता के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।




