मिडिल ईस्ट संकट पर PM मोदी की हाई लेवल बैठक: ऊर्जा आपूर्ति और LPG पर बड़ा फोकस

नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में तेल, गैस और उर्वरक की आपूर्ति को सुनिश्चित करना और वैश्विक ऊर्जा संकट के संभावित प्रभावों से निपटने की रणनीति तैयार करना रहा। इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

सप्लाई चेन पर संकट की आशंका

कारकप्रभाव
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रणवैश्विक शिपिंग रूट प्रभावित
मिडिल ईस्ट संघर्षतेल-गैस आपूर्ति में बाधा
भारत की निर्भरताखाड़ी देशों से ऊर्जा आयात

28 फरवरी से जारी इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सीमित किए जाने से भारत के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है।

सरकार के त्वरित कदम

केंद्र सरकार ने घरेलू और व्यावसायिक गैस आपूर्ति को बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।

  • घरेलू LPG सिलेंडरों की सप्लाई सामान्य
  • कमर्शियल LPG आवंटन में बढ़ोतरी
  • अस्पताल और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता
  • कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी
  • PNG कनेक्शन विस्तार पर जोर

पीएम मोदी का ‘नेशनल कैरेक्टर’ पर जोर

प्रधानमंत्री ने पहले भी इस वैश्विक संकट को ‘राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा’ बताया था। उन्होंने जनता से धैर्य और जागरूकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े।

कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भारत

देशसंपर्क
सऊदी अरबऊर्जा सहयोग पर चर्चा
यूएई, कतरआपूर्ति सुनिश्चित करने पर संवाद
इजरायल, ईरानतनाव कम करने और रणनीतिक वार्ता

प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध शुरू होने के बाद से कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। आज की बैठक में इन कूटनीतिक प्रयासों के परिणाम और वैकल्पिक सप्लाई रूट पर भी चर्चा होने की संभावना है।

आगे की रणनीति

सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक अस्थिरता का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कम से कम पड़े। इसके लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता, घरेलू उत्पादन और आपूर्ति प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार की सक्रियता यह दर्शाती है कि देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री की अगुवाई में हो रही उच्च स्तरीय बैठकें आने वाले समय में भारत की रणनीति को और स्पष्ट करेंगी।


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