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जन विश्वास विधेयक को मंजूरी, छोटे अपराधों में राहत और कारोबार को बढ़ावा

नई दिल्ली, 03 अप्रैल (वेब वार्ता)। देश में कारोबार से जुड़े माहौल को बेहतर बनाने के लिए और इस क्षेत्र में होने वाले छोटे-छोटे क्राइम को रोकने के लिए भारत सरकार ने जन विश्वास विधेयक को गुरुवार को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक में 79 कानूनों के 784 प्रावधनों में संशोधन को मंजूरी दी गई है. राज्यसभा में हुई विधेयक पर चर्चा  केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आखिर में जवाब दिया, इसके बाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया. लोकसभा में यह विधेयक एक दिन पहले ही पारित हुआ था.

गोयल ने इस विधेयक को लेकर कहा है कि एक कल्चर बनाना है और विश्वास की संस्कृति भय के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वास के आधार पर बनेगी. उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित कानून को इसी सोच के साथ लाया जा रहा है कि विश्वास के साथ विकसित भारत बनाया जाए. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में सबसे बड़ा यह प्रावधान किया गया है कि यह आपको सुधरने का मौका देता है. उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले देश में करीब 500 स्टार्टअप थे. आज इनकी संख्या तीन लाख से अधिक हो चुकी है. इन स्टार्टअप के संचालक युवाओं से छोटी-मोटी गलतियां हो सकती हैं लेकिन हमें उन्हें इनके लिए सजा देने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री ने और क्या जानकारी दी?

गोयल ने कहा कि इस कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनमें छोटी-मोटी गलती होने पर पहले चेतावनी दी जाएगी. दूसरी बार, गलती की तो दंड लगेगा और फिर यदि कुछ और गंभीर गलती करते हैं तो तीसरी बार दंड बढ़ जाएगा और अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा.

इसके अलावा गोयल ने कहा कि एक संशोधन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में लाया गया है. अगर कोई व्यक्ति गलत दवाई बेचता है, रखता है, आयात करता है, वितरण करता है या नकली दवाई रखता या बेचता है तो प्रावधान में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसपर जुर्मान पहले जैसा ही रखा गया है. उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ इतना किया कि किसी के पास आयुष, होम्योपैथिक दवा मिल जाए, तो जिसने बनाते वक्त उस पर अपना नाम नहीं लिखा, उस पर कार्रवाई हो. छोटे-मोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करने से क्या फायदा होगा?

इस विधेयक में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, बीमा अधिनियम, और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम में भी संशोधन प्रस्तावित हैं.  इसके अतिरिक्त, कोयला खान भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, पेटेंट अधिनियम, विधिक माप विज्ञान अधिनियम, छावनी अधिनियम 2006, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006, फार्मेसी अधिनियम, 1948, दिल्ली पुलिस अधिनियम, विद्युत अधिनियम, और रेलवे अधिनियम में भी परिवर्तन प्रस्तावित किए गए हैं.

सरकार ने छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और व्यापार एवं जीवन में सुगमता बढ़ाने के प्रावधान वाले इस विधेयक को 27 मार्च को लोकसभा में पेश किया था. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले वर्ष 18 मार्च को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को लोकसभा में पेश किया था, जिसे प्रवर समिति को भेजा गया था. भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति की सिफारिशों को शामिल कर यह विधेयक सदन में लाया गया.

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