जयपुर के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में कक्षा चार की एक छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने की दुखद घटना ने देशभर को झकझोर दिया है। इस घटना से प्रसिद्ध कलाकार महेश वैष्णव भी गहरे आहत हैं। गोबर से अद्भुत चित्रकला और भित्ति चित्र (म्यूरल) बनाने के लिए जाने जाने वाले महेश वैष्णव का कहना है कि इतनी कम उम्र में किसी बच्चे के मन में जीवन समाप्त करने का विचार आना समाज, परिवार और शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

वेबवार्ता के प्रबंध संपादक इरफ़ान शेख से बातचीत में महेश वैष्णव ने कहा, “कक्षा चार की एक बच्ची का आत्महत्या जैसा कदम उठाना बेहद पीड़ादायक है। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। हमें यह समझना होगा कि हमारे बच्चे किस मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं।”
महेश वैष्णव अपनी अनूठी कला के लिए देशभर में पहचान रखते हैं। उन्होंने गोबर से भगवान-देवी-देवताओं, राष्ट्रीय नेताओं तथा कई प्रतिष्ठित हस्तियों के चित्र बनाए हैं। उनके द्वारा निर्मित एक विशेष चित्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भेंट किया जा चुका है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी अपनी कला कृति भेंट करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कला को केवल सौंदर्य का माध्यम न मानकर सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण बनाया जाए। इसी उद्देश्य से वे सिटी 360 द्वारा शुरू किए गए “प्रोजेक्ट पेंट” के माध्यम से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाएंगे।

महेश वैष्णव ने बताया कि इस अभियान के तहत वे अपनी चित्रकला के माध्यम से ऐसा मंच तैयार करेंगे जहाँ शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी खुलकर संवाद कर सकें। उनका मानना है कि बच्चों की समस्याओं का समाधान केवल सलाह देने से नहीं, बल्कि उन्हें सुनने और समझने से निकलेगा।
उन्होंने कहा, “हर बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनने वाला कोई है। यदि परिवार, शिक्षक और समाज मिलकर बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं, तो कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।”
इस जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों से की जाएगी। बच्चों को तनाव, अवसाद और मानसिक दबाव से उबरने में सहायता देने के लिए सामाजिक संस्था ‘एक एहसास’ (EK Ehsaas) भी इस आंदोलन का हिस्सा बनेगी।
महेश वैष्णव का मानना है कि कला सीधे दिल तक पहुंचती है और कई बार वे बातें कह देती है जिन्हें शब्द व्यक्त नहीं कर पाते। वे अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से बच्चों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, अपनी भावनाओं को साझा करने और कठिन परिस्थितियों में मदद मांगने के लिए प्रेरित करेंगे।
यह पहल केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उन मासूम जिंदगियों को बचाने की कोशिश है जो कभी-कभी दबाव, भय या अकेलेपन के कारण टूट जाती हैं। महेश वैष्णव का संदेश स्पष्ट है—“बच्चों को अंक नहीं, अपनापन चाहिए; प्रतियोगिता नहीं, संवाद चाहिए; और सबसे बढ़कर यह विश्वास चाहिए कि हर समस्या का समाधान है, जीवन का अंत नहीं।”




