मोहन भागवत की सुरक्षा लागत वसूली याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने मंशा पर उठाए सवाल

नागपुर, 22 अप्रैल (वेब वार्ता)। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को प्रदान की गई जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा की लागत उनसे वसूलने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मंशा और उद्देश्य पर भी गंभीर सवाल उठाए।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे इसे स्वीकार किया जा सके। अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया।

याचिका नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा दायर की गई थी, जिसमें यह तर्क दिया गया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक पंजीकृत संस्था नहीं है, इसलिए उसके प्रमुख को सरकारी खर्च पर सुरक्षा देना करदाताओं के धन का दुरुपयोग है। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इस सुरक्षा पर प्रतिमाह लगभग 40 से 45 लाख रुपये खर्च होते हैं और यह राशि संबंधित व्यक्ति से वसूल की जानी चाहिए।

अदालत को बताया गया कि मोहन भागवत को जून 2015 में जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। वर्तमान में उनकी सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जिम्मे है, जबकि इससे पहले यह जिम्मेदारी महाराष्ट्र पुलिस के पास थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने उद्योगपति मुकेश अंबानी से जुड़े एक पुराने फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने सुरक्षा का खर्च संबंधित पक्ष द्वारा वहन करने की बात कही थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस तर्क को इस मामले में प्रासंगिक नहीं माना और याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत के इस निर्णय के बाद स्पष्ट हो गया है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में नीतिगत निर्णयों को चुनौती देने के लिए ठोस कानूनी आधार आवश्यक है।

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