फालाकाटा में लॉटरी सिस्टम के खिलाफ बढ़ा आक्रोश, गरीबों पर पड़ रहा भारी असर

अलीपुरद्वार, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल के फालाकाटा क्षेत्र में लॉटरी प्रणाली के खिलाफ लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा अब सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय बनता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लॉटरी गरीब तबके के लिए नुकसान, कर्ज और लत का कारण बन चुकी है।

फालाकाटा के कई निवासियों ने बताया कि वे प्रतिदिन 800 से 900 रुपये तक की लॉटरी टिकट बेचते हैं, लेकिन उनकी आय सुनिश्चित नहीं होती। यदि टिकट जीत जाए तभी लाभ मिलता है, अन्यथा उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इस काम से जुड़े अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर और बेरोजगार हैं।

लॉटरी प्रणाली का असर केवल विक्रेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि खरीदार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी दीपक के अनुसार, कई बार टिकट न बिकने पर दुकानदारों को खुद ही टिकट खरीदनी पड़ती है, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में एक सदस्य ने लॉटरी की दुकान शुरू की, लेकिन मात्र एक महीने में लगभग एक लाख रुपये का नुकसान हो गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लॉटरी के कारण कर्ज और मानसिक दबाव की स्थिति भी पैदा हो रही है। कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। निवासी शंकर मजूमदार ने बताया कि कई युवाओं ने ब्याज पर कर्ज लेकर लॉटरी में पैसा लगाया और सब कुछ गंवा दिया। दैनिक मजदूरी करने वाले लोग भी अपनी आय का बड़ा हिस्सा लॉटरी में खर्च कर देते हैं, जिससे उनके परिवारों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

लॉटरी प्रणाली को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। स्थानीय निवासी विक्रमादित्य का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह असंतुलित है, जिसमें न विक्रेता को स्थायी लाभ मिलता है और न ही खरीदार को। लाखों लोग पैसा लगाते हैं, लेकिन जीतने वाले बहुत कम होते हैं।

वहीं, लंबे समय से लॉटरी खरीदने वाले लोगों में भी निराशा बढ़ती जा रही है। ट्रक चालक असित देबनाथ के अनुसार, उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन बहुत कम राशि ही वापस मिल सकी। अन्य लोगों ने भी इसे एक प्रकार की लत बताते हुए कहा कि इससे आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जाती है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। फालाकाटा के लोग चाहते हैं कि सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल करें और लॉटरी प्रणाली को समाप्त करने के साथ-साथ इससे जुड़े लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करें।

स्थानीय स्तर पर उठ रही यह मांग अब एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिख रही है, जिसने सरकार और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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