नई दिल्ली, 20 जून (वेब वार्ता)। दिल्ली लोक निर्माण विभाग में कार्यरत अभियंताओं के तबादलों और नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तथा निष्पक्ष बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद तबादलों और पदस्थापन से जुड़ी सिफारिशों तथा मनमाने हस्तक्षेप पर प्रभावी रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन तबादला और नियुक्ति प्रक्रिया की शुरुआत अधिशासी अभियंताओं की सूची जारी करने के साथ की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य श्रेणियों के अधिकारियों और अभियंताओं को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि नई प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों के बीच कार्य संतुष्टि में वृद्धि होगी तथा विभागीय कार्यकुशलता और जवाबदेही भी बेहतर होगी। इसके साथ ही तबादलों और पदस्थापन को लेकर लंबे समय से उठते रहे विवादों और शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने दिल्ली में कार्यरत अभियंताओं से संबंधित विस्तृत आंकड़े और विवरण मांगे थे, जिन्हें विभाग द्वारा उपलब्ध करा दिया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत तबादला व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
गौरतलब है कि वर्तमान में दिल्ली में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से संबद्ध 1200 से अधिक अभियंता सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई अधिकारी लंबे समय तक राजधानी में ही पदस्थ रहने का प्रयास करते हैं। इसके लिए कई बार उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सिफारिशें कराने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूर्व में इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि यदि कोई अभियंता अपने तबादले या पदस्थापन के लिए सिफारिश करवाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली लोक निर्माण विभाग में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अभियंता ही कार्यरत रहते हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार कोई अभियंता दिल्ली स्टेशन पर अधिकतम छह वर्ष तक सेवाएं दे सकता है। यह अवधि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और दिल्ली लोक निर्माण विभाग में बिताए गए कुल कार्यकाल को मिलाकर निर्धारित की जाती है।
हालांकि, जब अन्य राज्यों में निर्धारित कार्यकाल पूरा कर चुके अभियंताओं को दिल्ली में पदस्थ करने की प्रक्रिया शुरू होती है, तब उसी अनुपात में दिल्ली से भी अभियंताओं को अन्य राज्यों में स्थानांतरित किया जाता है। इसी कारण कई बार अधिकारियों का तबादला निर्धारित छह वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले भी हो जाता है।
नई ऑनलाइन व्यवस्था को विभागीय प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे पदस्थापन और तबादलों की प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बन सकेगी।




