नई दिल्ली, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जहां उसके सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने को सभापति की मंजूरी मिल गई है। इस घटनाक्रम के बाद उच्च सदन में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं और आप की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों के खिलाफ पहले कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन अब उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया गया है।
अयोग्यता की मांग उठी
संजय सिंह ने कहा कि सातों सांसदों द्वारा विलय का पत्र दिया गया है, जिस पर सभापति ने संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने खुद सभापति को पत्र लिखकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
उनका कहना है कि अभी तक इस याचिका पर सुनवाई नहीं हुई है और उन्हें उम्मीद है कि इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव
सभापति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद संसद की आधिकारिक सूची में इन सातों सांसदों को अब भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में दर्ज कर लिया गया है। इससे राज्यसभा में आप की ताकत में कमी आई है और सत्ता पक्ष को मजबूती मिली है।
सांसदों ने बताया फैसला क्यों लिया
सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने पार्टी की नीतियों और विचारधारा से असहमति जताते हुए भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।
इस बीच राघव चड्ढा ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनका यह निर्णय व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक उद्देश्य के तहत लिया गया है और वे जनता के मुद्दों को और मजबूती से उठाते रहेंगे।
आप ने दायर की याचिका
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने सभापति के समक्ष याचिका दायर कर इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह दल-बदल कानून का उल्लंघन है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या होगा
अब इस पूरे मामले में सभापति के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यदि अयोग्यता की याचिका पर सुनवाई होती है, तो यह मामला और अधिक राजनीतिक और कानूनी रूप ले सकता है।



