इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 8 जुलाई (वेब वार्ता)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले कई सप्ताह से जारी जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ व्यापक विरोध दर्ज करा रहे हैं तथा अपनी मांगों को लेकर 8 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है। आंदोलन में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग, गिरफ्तारियां और अन्य कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन लगातार फैलता जा रहा है। रावलकोट, मुजफ्फराबाद, मीरपुर और ददियाल सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
महिलाओं की बड़ी भागीदारी
रावलकोट बस अड्डे पर बड़ी संख्या में महिलाएं कई दिनों से धरने पर बैठी हैं। उनके साथ बच्चे भी मौजूद हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आवश्यक वस्तुओं, खाद्य सामग्री और दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित की गई है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
38 मांगों को लेकर आंदोलन
आंदोलन का नेतृत्व कर रही ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार के सामने 38 मांगें रखी हैं। इनमें बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गिरफ्तार नेताओं की रिहाई तथा उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा की आरक्षित सीटों को लेकर भी आंदोलनकारियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था के माध्यम से राजनीतिक हस्तक्षेप किया जाता है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी, गिरफ्तारियां और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए हैं। आंदोलन से जुड़े कई नेताओं पर आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत मामले दर्ज किए जाने का भी दावा किया गया है।
हिंसक घटनाओं का भी दावा
ददियाल और मुजफ्फराबाद सहित कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गोलीबारी और बल प्रयोग में कई लोग घायल हुए तथा एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
नियंत्रण रेखा की ओर मार्च की चेतावनी
आंदोलन के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गईं, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने नियंत्रण रेखा की ओर मार्च निकालने की भी बात कही है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विदेशों में भी उठी आवाज
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के समर्थन में विदेशों में भी प्रदर्शन किए गए हैं। लंदन में पाकिस्तान के उच्चायोग के बाहर आयोजित विरोध प्रदर्शन में कश्मीरी प्रवासियों सहित विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
8 जुलाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की निगाहें 8 जुलाई की समय-सीमा पर टिकी हैं। यदि पाकिस्तान सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई समाधान नहीं निकलता है, तो क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। यह आंदोलन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रशासन और सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक तथा सुरक्षा चुनौती के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।




