नई दिल्ली, 3 मई (वेब वार्ता)। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के प्रभाव को देखते हुए भारत अब विदेशों में रखा अपना सोना तेजी से वापस ला रहा है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच सतर्क भारत
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने कई देशों को अपनी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क कर दिया है। इसी कड़ी में भारत भी अपने स्वर्ण भंडार को देश के भीतर सुरक्षित रखने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। लंबे समय से भारत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों के बैंकों, विशेषकर ब्रिटेन में सुरक्षित रखा जाता रहा है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
तेजी से उठाए जा रहे कदम
रिपोर्टों के अनुसार, केवल भारत ही नहीं बल्कि अन्य देश भी अपने स्वर्ण भंडार को लेकर पुनर्विचार कर रहे हैं। संभावित प्रतिबंधों और युद्ध जैसी स्थितियों के मद्देनजर भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने स्वर्ण को देश के भीतर लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े क्या कहते हैं
भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर से मार्च के बीच भारत के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना मौजूद है। इसमें से लगभग 77 प्रतिशत, यानी करीब 680 टन सोना अब देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। शेष 197.67 टन सोना विदेशी संस्थानों के पास रखा है, जबकि एक छोटा हिस्सा जमा के रूप में है।
छह महीनों में बड़ी वापसी
विशेष बात यह है कि केवल छह महीनों के भीतर ही भारत ने 104.23 मीट्रिक टन सोना विदेशों से वापस मंगाया है। तुलना करें तो मार्च 2023 तक भारत का केवल 37 प्रतिशत स्वर्ण भंडार ही देश में था। इस तेजी से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब बाहरी जोखिमों को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क हो गया है।
आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश अपनी वित्तीय स्थिरता और संप्रभुता को मजबूत करना चाहता है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में स्वर्ण भंडार को देश में रखना एक सुरक्षित और रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।
भारत द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य में संभावित वैश्विक संकटों के प्रभाव को कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।



