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यह खुशी और दर्द का लम्हा : फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई पर बोले परिजन

रामल्लाह/यरूशलेम, (वेब वार्ता)। इजरायल की ओर से रिहा किए गए फिलिस्तीनी कैदियों को लेकर दो बसें पश्चिमी तट के रामल्लाह पहुंचीं। कैदियों के इसे ‘खुशी और दर्द दोनों का लम्हा’ बताया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार को फिलिस्तीनी बंदियों का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। वे लोग जश्न में नारे लगा रहे थे और झंडे लहरा रहे थे।

रिहा किए गए कैंदियों के परिवार उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और उनमें से कई अपनों से मिलकर फूट-फूट कर रोने लगे।

एक कैदी के रिश्तेदार समाह अबेद ने कहा, “यह खुशी और दर्द दोनों का लम्हा है।” उन्होंने रिहाई पर राहत व्यक्त की, लेकिन इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष पर निराशा भी जाहिर की।

नाम न बताने की शर्त पर सिन्हुआ से बात करते हुए एक इजरायली सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि यहूदी राष्ट्र ने गाजा युद्धविराम समझौते के तहत गुरुवार को 110 फिलिस्तीनियों बंदियों को रिहाई कर दिया है। समझौता 19 जनवरी को प्रभावी हुआ था।

बसें लगभग 66 फ़िलिस्तीनी बंदियों को ओफर जेल से कब्जे वाले वेस्ट बैंक में रामल्लाह लेकर पहुंची। वहीं, 15 अन्य को पूर्वी यरुशलम में एक हिरासत केंद्र में पहुंचाया, जहां से उन्हें रिहा कर दिया गया।

अधिकारी ने कहा कि इजरायलियों के खिलाफ हमलों में शामिल होने के दोषी कुल 29 कैदियों को मिस्र और अन्य देशों में भेजा जाना है।

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर जारी की गई। इसमें पश्चिमी तट के जेनिन में फतह के अल-अक्सा शहीद ब्रिगेड के पूर्व कमांडर और हाई-प्रोफाइल कैदी जकारिया जुबैदी को बस में विक्ट्री-साइन बनाते हुए दिखाया गया है।

इजरायल के सरकारी स्वामित्व वाले कान टीवी न्यूज ने बताया कि उनकी रिहाई से पहले, देश की शिन बेट घरेलू सुरक्षा एजेंसी ने बंदियों को चेतावनी दी। एजेंसी ने कहा कि अगर उन्होंने आतंकवादी गतिविधियां फिर से शुरू कीं तो उन्हें ‘खत्म’ कर दिया जाएगा।

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