मुरादाबाद: स्पाइन सर्जरी की सलाह मिलने पर कई मरीज लकवा होने, लंबे समय तक बिस्तर पर रहने और ऑपरेशन के बाद दर्द बढ़ने के डर से इलाज टाल देते हैं। हालांकि, आधुनिक मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी (MISS) से कई मामलों में मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचाकर रिकवरी आसान बनाई जा सकती है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. प्रंकुल सिंघल के अनुसार, हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती, लेकिन सही मरीज में आधुनिक तकनीक बेहतर परिणाम देने में मदद कर सकती है।
पहला डर लकवा होने का है, जबकि विशेषज्ञों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच और सही तकनीक से जोखिम कम करने का प्रयास किया जाता है। दूसरा डर महीनों तक बिस्तर पर रहने का है। कई मरीज सर्जरी के कुछ घंटों बाद चलने लगते हैं। तीसरा डर सर्जरी से फायदा न होने का है, इसलिए सही निदान बेहद जरूरी है।
चौथा डर बढ़ती उम्र में सर्जरी का है। हालांकि, फैसला उम्र के बजाय मरीज की संपूर्ण सेहत के आधार पर लिया जाता है। पांचवां डर असहनीय दर्द का है। आधुनिक तकनीकों और दवाओं से दर्द नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
इसलिए डर के कारण इलाज टालने के बजाय डॉक्टर से संभावित जोखिम, विकल्प और रिकवरी पर चर्चा करनी चाहिए।




