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स्लीपर बसों में माल का बोझ, यात्रियों की जान से खिलवाड़!

ललितपुर,(आलोक चतुर्वेदी) स्लीपर बसें यात्रियों को सुरक्षित सफर कराने के लिए हैं या माल ढुलाई का जरिया बनती जा रही हैं? ललितपुर से गुजरने वाली हर स्लीपर बस की छत पर और डिग्गी में व्यावसायिक सामान ढोया जा रहा है । ललितपुर से गुजरती बस की तस्वीर सामने आने के बाद यात्री सुरक्षा और परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। देश में स्लीपर बसों से जुड़े गंभीर हादसों के बीच इस तरह की तस्वीर को नजरअंदाज करना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं होगा।
तस्वीर में ‘राज कल्पना’ नाम से दिखाई दे रही बस की छत पर बड़े-बड़े पैकेट तिरपाल से ढककर रस्सियों के सहारे बांधे गए हैं। ऐसे में सवाल है कि बस में ले जाया जा रहा सामान यात्रियों के निजी बैग-सूटकेस हैं या व्यावसायिक माल? यदि यात्री परिवहन के लिए संचालित बसों में नियमों के विपरीत माल ढोया जा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? परिवहन विभाग की निगरानी के बावजूद ऐसी स्थिति सामने आना जांच की जरूरत को रेखांकित करता है।
हादसों के बाद भी सुरक्षा पर सख्ती जरूरी
स्लीपर बसों में आग और अन्य गंभीर दुर्घटनाओं की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा चुकी हैं। ऐसी दुर्घटनाओं में आग से बचाव, आपातकालीन निकास, बस की संरचना और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था जैसे पहलू बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में बसों में सामान की सुरक्षित ढुलाई और वाहन की निर्धारित क्षमता की अनदेखी की आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
छत पर रखा भारी सामान यदि उचित तरीके से सुरक्षित नहीं है, तो यात्रा के दौरान उसके खिसकने या गिरने का खतरा हो सकता है। वहीं, वाहन की क्षमता और संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका की जांच जरूरी है। इसलिए केवल बस के कागजात देखकर उसे सड़क पर चलने की अनुमति देना पर्याप्त नहीं; सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन भी सुनिश्चित होना चाहिए।
#अब विभाग की निगरानी और कार्रवाई की परीक्षा#
ललितपुर से होकर गुजरने वाली लंबी दूरी की स्लीपर बसों के परमिट, फिटनेस, निर्धारित मार्ग और सामान की ढुलाई की व्यवस्था की जांच जरूरी है। परिवहन विभाग को यह भी देखना चाहिए कि छत पर सामान रखने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं और बस यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक मानकों का पालन कर रही है या नहीं।
यदि पहले भी ऐसी बसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, तो यह देखना भी जरूरी है कि उसका असर कितना हुआ। नियमों का उल्लंघन मिलने पर केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय नियमानुसार प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
सवाल यह है कि क्या परिवहन विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा, या समय रहते बसों की जांच कर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा? अब संबंधित बस की जांच और उसके परिणाम पर निगाह रहेगी। यात्री सुरक्षा के मामले में आश्वासन से आगे बढ़कर धरातल पर कार्रवाई दिखाई देना जरूरी है।
एआरटीओ का बयान
“यात्रियों के बैग-सूटकेस ही ले जाने की अनुमति, माल ढुलाई नियम विरुद्ध”
ललितपुर के एआरटीओ विपिन चौधरी ने बताया कि स्लीपर बसों में यात्रियों के बैग और सूटकेस ही ले जाने की अनुमति होती है। यदि इस प्रकार बसों में माल ढोया जा रहा है, तो यह नियम विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी कुछ बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस मामले में भी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

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