लक्ष्मीकान्त पाठक
हरदोई (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक एवं लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के तहत 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में मतदाता वैकल्पिक पहचान पत्रों के माध्यम से भी अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे। जिन मतदाताओं के पास मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) उपलब्ध नहीं होगा, वे निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत कर मतदान कर सकेंगे।
जिलाधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी राहुल पाण्डेय ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने मतदान के दौरान प्रतिरूपण रोकने और मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिन मतदाताओं को मतदाता फोटो पहचान पत्र जारी किया गया है, उन्हें मतदान से पहले अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए यह पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि कोई मतदाता अपना मतदाता फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उसे निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक दिखाकर अपनी पहचान स्थापित करनी होगी।
इन वैकल्पिक पहचान पत्रों का कर सकेंगे इस्तेमाल
जिलाधिकारी ने बताया कि मतदाता पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और भारतीय पासपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार, केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्थानीय निकायों अथवा अन्य निजी औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी पहचान पत्र भी मान्य होंगे।
सांसदों, विधायकों एवं पार्षदों को जारी सरकारी पहचान पत्र भी वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। संबंधित शिक्षक या स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक जिस शैक्षिक संस्थान में कार्यरत हैं, उस संस्थान द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र भी स्वीकार्य होगा।
इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिग्री या डिप्लोमा का मूल प्रमाण पत्र, सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता संबंधी मूल प्रमाण पत्र तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड भी पहचान प्रमाणित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे 23 अक्टूबर को मतदान के समय अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए मतदाता फोटो पहचान पत्र अथवा निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में से कोई एक अपने साथ लेकर जाएं, जिससे पहचान सत्यापन में अनावश्यक परेशानी न हो और मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न कराई जा सके।




