लक्ष्मीकान्त पाठक
हरदोई (वेबवार्ता)। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र की परेली ग्राम पंचायत का मजरा पहाड़पुर बदहाली से जूझ रहा है। जलभराव के चलते शिवपुरी (मजरा अतर्जी) से पहाड़पुर को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है। सड़क का अस्तित्व तक नजर नहीं आने से ग्रामीणों का आवागमन बाधित है। वहीं, शिवपुरी के किसानों के लिए अपने खेतों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। गांव की इस स्थिति ने विकास कार्यों और जलनिकासी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जलनिकासी के अभाव में खेत बने तालाब, धान की फसल पर संकट
ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी खेतों में भरा हुआ है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सैकड़ों बीघा धान की फसल जलमग्न होने से उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों ने फसल तैयार करने में खाद, बीज, सिंचाई और मेहनत पर अपनी जमा-पूंजी लगा दी, लेकिन अब खेतों में भरे पानी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है। यदि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रधान के अपने मजरे में बदहाली, विकास कार्यों पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि पहाड़पुर परेली ग्राम पंचायत के वर्तमान ग्राम प्रधान का मूल निवास भी है। इसके बावजूद गांव में मुख्य संपर्क मार्ग और जलनिकासी की समस्या दूर नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब ग्राम प्रधान के अपने मजरे में ही सड़क की हालत इतनी खराब है और जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, तो पंचायत में विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराकर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
सड़क बहाल कराने और फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग
जलभराव से परेशान ग्रामीणों और किसानों ने तहसील तथा जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए और पानी की निकासी में बाधा बन रहे नालों तथा जलनिकासी के रास्तों को दुरुस्त कराना चाहिए। साथ ही, जलभराव से प्रभावित संपर्क मार्ग की मरम्मत कराकर आवागमन बहाल किया जाए।
किसानों ने कृषि विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम से जलमग्न फसलों का निष्पक्ष सर्वे कराने तथा नियमानुसार मुआवजा दिलाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते राहत कार्य शुरू नहीं हुए, तो फसल बर्बाद होने से आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
पहाड़पुर की मौजूदा स्थिति ग्रामीण विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर कर रही है। सड़क पर जलभराव, खेतों में भरा पानी और फसल खराब होने की आशंका ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्या के समाधान के लिए कितनी जल्दी कदम उठाते हैं, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिले और किसानों की फसल को बचाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा सकें।
विकास के दावों की खुली पोल: प्रधान के अपने मजरे में सड़क गायब, जलभराव से आवागमन ठप

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