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भारतीय मूल की त्रिनिदाद की छात्रा हेली पिसाडी बनीं ‘मिस इंडिया वर्ल्डवाइड’

पोर्ट ऑफ स्पेन, 06 अक्टूबर (वेब वार्ता)। भारतीय मूल की महिलाओं के लिए आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में त्रिनिदाद और टोबैगो का प्रतिनिधित्व करने वाली 19 साल की लॉ स्टूडेंट हेली पिसाडी ने ‘मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026’ का ख‍िताब अपने नाम क‍िया। यह इस प्रतियोगिता का 33वां संस्करण था।

मीडिया रिलीज के मुताबिक, त्रिनिदाद और टोबैगो के ‘नेशनल एकेडमी फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ (एनएपीए) में आयोजित कार्यक्रम में वर्ल्डवाइड पेजेंट्स की को-चेयरपर्सन नीलम सरन ने पिसाडी को ताज पहनाया।

इस प्रतियोगिता में कई देशों से भारतीय मूल की महिलाओं ने हिस्सा लिया। आयोजकों के मुताबिक, यह भारत के बाहर आयोजित होने वाली सबसे लंबे समय से चल रही भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता है। कार्यक्रम में दो और खिताब दिए गए। अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाली डॉ. श्रीदेवी मंगिनानी को ‘मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड 2026’ का ताज पहनाया गया। वहीं, नीदरलैंड्स की लूना जयराम ने ‘मिस टीन इंडिया वर्ल्डवाइड 2026’ का खिताब जीता।

मेजबान देश त्रिनिदाद और टोबैगो का प्रतिनिधित्व करने वाली पिसाडी फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं। कार्यक्रम की तस्वीरों में जीत के बाद पिसाडी को ‘मिस इंडिया वर्ल्डवाइड’ का ताज और सैश पहने हुए दूसरे विजेताओं के साथ देखा गया।

इस प्रतियोगिता का आयोजन भारतीय-अमेरिकी नीलम सरन और धर्मात्मा सरन ने ‘वर्ल्डवाइड पेजेंट्स’ के जरिए किया। इसमें त्रिनिदाद और टोबैगो के लिए संगठन के नेशनल डायरेक्टर्स नेहा करीना मीना और उमेश मीना ने भी सहयोग किया।

यह प्रतियोगिता अलग-अलग देशों में रहने वाली भारतीय मूल की महिलाओं को एक मंच पर लाती है। तीन दशक से ज्यादा समय में यह भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में उभरी है। इस साल प्रतियोगिता ने अपने 33 साल पूरे किए। त्रिनिदाद और टोबैगो ने दुनियाभर के भारतीय समुदाय से आए प्रतियोगियों और आयोजकों की मेजबानी की।

तीन मुख्य विजेता, हेली पिसाडी, श्रीदेवी मंगिनानी और लूना जयराम, तीन अलग-अलग देशों और भारतीय प्रवासी समुदाय की अलग-अलग पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

त्रिनिदाद और टोबैगो के नेशनल एकेडमी फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनएपीए) में आयोजित यह कार्यक्रम पारंपरिक सौंदर्य प्रतियोगिताओं से अलग रहा। इसमें सुंदरता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं, परफॉर्मिंग आर्ट्स और मूल्यों पर भी खास जोर दिया गया।

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